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पहला कदमः जानें इंश्योरेंस की टेक्निकल टर्म

प्रकाशित Sat, 13, 2016 पर 14:09  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी आवाज़ की फाइनेंशियल लिटरेकी की मुहिम पहला कदम में हमने चर्चा शुरू की है इंश्योरेंस की। हमें उम्मीद है कि इंश्योरेंस से जुड़ी शुरुआती जानकारियां आपको मिल गई होंगी। फिर भी अगर आपके जेहन में कोई सवाल है तो आप हमें लिख सकते हैं सीएनबीसी आवाज के फेसबुक पेज पर या फिर हमारी वेबसाइट pehlakadam.in पर अपना संदेश भी छोड़ सकते हैं। केवल इंश्योरेंस ही नहीं बल्कि निवेश से जुड़ा कोई भी सवाल आप हम तक पहुंचा सकते हैं। तो चलिए आज बात करते हैं इंश्योरेंस टर्म्स की यानि इंश्योरेंस से जुड़े कुछ ऐसे तकनीकी शब्दों की जिन्हे लेकर हम अक्सर कन्फ्यूज हो जाते हैं। इंश्योरेंस की जानकारी के एक्सपर्ट के तौर रक हमारे साथ हैं सीएनबीसी-आवाज के मार्केट एडिटर अनिल सिंघवी।


इंश्योरेंस क्या है
इंश्योरेंस यानि जोखिम से सुरक्षा या सीमित रकम में बड़ी सुरक्षा जो आपके ना रहने की सूरत में आपके परिवार को सुरक्षा दे सकता है। वहीं इंश्योरेंस से नुकसान की भरपाई भी हो सकती है।


सम एश्योर्ड किसे कहते हैं?
सम एश्योर्ड यानि बीमे की रकम। यानी जितनी रकम का बीमा लिया गया, उस रकम को सम एश्योर्ड कहा जाता है। सम एश्योर्ड गारंटीड रकम है जो पॉलिसी के फीचर के मुताबिक पॉलिसी होल्डर या उसके वारिस को मिल जाएगी।


सम एश्योर्ड कितना करवाएं?
सालाना कमाई का 20-30 गुना तक सम एश्योर्ड मिल सकता है या आप इतना इंश्योरेंस करवा सकते हैं।


इंश्योर्ड किसे कहते हैं?
जिसके नाम से इंश्योरेंस किया जाता है उसे इंश्योर्ड कहा जाता है। ध्यान रखें कि एक निश्चित उम्र तक ही इंश्योरेंस करा सकते हैं औ बीमा कंपनियां इंश्योरेंस करने से पहले व्यक्ति की शारीरिक हालत भी देखती हैं। इंश्योरेंस कराने वाले व्यक्ति की फिटनेस सही होनी चाहिए।


बोनस किसे कहते हैं?
इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ मिलने वाले फायदों को बोनस कह सकते हैं। पॉलिसी लेते वक्त बोनस लेने का ऑप्शन चुनना होता है वहीं कुछ पॉलिसी में इनबिल्ट बोनस होता है। मुनाफे होने पर इंश्योरेंस कंपनियां बोनस देती हैं और बोनस देना इंश्योरेंस कंपनियों के परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है। इंश्योरेंस कंपनियों की मर्जी पर बोनस निर्भर है। बोनस पॉलिसी होल्डर की मृत्यु होने या पॉलिसी खत्म होने पर ही मिल सकता है और पॉलिसी होल्डर की मृत्यु होने या टर्म खत्म होने पर मैच्योरिटी के वक्त बोनस मिल सकता है। एक साथ सारा बोनस इकट्ठा दिया जाएगा। इंश्योरेंस में बोनस एक अतिरिक्त आकर्षण है लेकिन पॉलिसी में ज्यादा प्रीमियम बोनस की गारंटी नहीं है। 


पॉलिसी का क्राइटेरिया?
पॉलिसी होल्डर की जरूरतों के मुताबिक इंश्योरेंस होता है और हर पॉलिसी के फीचर अलग अलग होते हैं।


पार्टिसिपेटिंग पॉलिसी किसे कहते हैं?
इंश्योरेंस कंपनियां अपने मुनाफे से कुछ पैसा पॉलिसी होल्डर को देती हैं और नॉनपार्टिसिपेटिंग पॉलिसी का प्रीमियम ज्यादा होता है। नॉन पार्टिसिपेटिंग पॉलिसी में प्रीमियम कम होता है और इंश्योरेंस कोई निवेश नहीं है। 


प्रीमियम किसे कहते है?
इंश्योरेंस के खर्च को प्रीमियम कहा जाता है और प्रीमियम कई तरह के होते हैं। प्रीमियम की रकम अलग अलग तरह से भुगतान की जाती है और प्रीमियम एक मुश्त भी दिया जा सकता है। प्रीमियम के एक मुश्त भुगतान को सिंगल प्रीमियम कहा जाता है और प्रीमियम किश्तों में भी होता है। प्रीमियम मासिक 3 माह,6 माह या सालाना भी हो सकता है। सिंगल प्रीमियम में बार बार प्रीमियम भरने से छुटकारा मिल जाता है।


सिंगल प्रीमियम के फायदे-नुकसान


किश्तों में भुगतान पर प्रीमियम की रकम ज्यादा भरनी पड़ती है लेकिन जिनकी आमदनी रेगुलर नहीं है उनके लिए सिंगल प्रीमियम फायदेमंद रहता है। सिंगल प्रीमियम से बार बार प्रीमियम का झंझट खत्म हो जाता है। हालांकि इसमें टैक्स का फायदा नहीं मिलता है। प्रीमियम पॉलिसी पर निर्भर करता है और टर्म प्लान पर प्रीमियम की रकम कम रहती है। मनी बैक पर प्रीमियम ज्यादा देना होता है और ज्यादा समय के इंश्योरेंस पर प्रीमियम कम देना होता है। स्वस्थ व्यक्ति के लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम कम जबकि बीमार व्यक्ति का लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम ज्यादा रहता है।


पेइंग इन किसे कहते हैं?
कम समय प्रीमियर भरकर ज्यादा अवधि का इंश्योरेंस लेने को पेइंग इन कहते हैं। प्रीमियम पेइंग इन यानि वो अवधि जब तक पॉलिसी होल्डर प्रीमियम भरता है और प्रीमियम भरने की अवधि और इंश्योरेंस की अवधि अलग अलग होगी। कम अवधि के इंश्योरेंस के लिए प्रीमियम की रकम ज्यादा होगी।


प्रीमियम की रकम का ब्यौरा


टर्म इंश्योरेंस में प्रीमियम का ब्यौरे की जरूरत नहीं होती है और इंवेस्टमेंट वाली इंश्योरेंस पॉलिसी में प्रीमियम के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है।


टॉप अप प्रीमियम


टॉप अप यानी मौजूदा प्रीमियम की रकम थोड़ी बढ़ाने पर दूसरे नए फायदे हासिल करना।  जैसे, ज्यादा रकम देकर पॉलिसी में परिवार के सदस्यों को शामिल किया सकता है और इनकम बढ़ने पर प्रीमियम बढ़ाकर बीमा की रकम बढ़ाई जा सकती है। समय के साथ ग्राहक अपनी सहूलियत से प्रीमियम बढ़ा सकता है।


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