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पहला कदमः इंश्योरेंस और टैक्स प्लानिंग

प्रकाशित Sat, 25, 2017 पर 15:21  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पिछले कुछ एपिसोड्स से हम बात कर रहे हैं निवेश के ऐसे ऑप्शंस की जहां निवेश करके आप अच्छा मुनाफा कमाने के साथ-साथ टैक्स प्लानिंग भी कर सकते हैं। आज के एपिसोड में भी हम ऐसे ही कुछ विकल्पों की बात कर रहे हैं और इस सब पर विस्तार से बातचीत करने के लिए हमारे साथ बतौर एक्सपर्ट मौजूद हैं सीएनबीसी-आवाज के मार्केट्स एडिटर अनिल सिंघवी।


अनिल सिंघवी के मुताबिक पुराने दौर में इंश्योरेंस के लिए सिर्फ एलआईसी विकल्प के तौर पर मौजूदा था, लेकिन मौजूदा दौर में इंश्योरेंस के तमाम विकल्प हैं। इंश्योरेंस में सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। कुल इंश्योर्ड रकम के सालाना 10 फीसदी पर ही टैक्स छूट मिलती है। ध्यान रखें कि किसी भी कंपनी के इंश्योरेंस पर सेक्शन 80सी का लाभ मिलता है।


अनिल सिंघवी ने बताया कि लाइफ इंश्योरेंस के कई प्रोडक्ट बाजार में मौजूद हैं। लाइफ इंश्योरेंस के हर प्रोडक्ट पर टैक्स बेनिफिट मिलता है। दरअसल जिनकी रेगुलर इनकम नहीं है, ऐसे लोग सिंगल प्रीमियम पॉलिसी को चुनते हैं। सिंगल प्रीमियम पॉलिसी में कम से कम 2 साल पॉलिसी रखने का प्रावधान है।


अनिल सिंघवी का मानना है कि टैक्स प्लानिंग के लिए लाइफ इंश्योरेंस लेना ठीक नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि जरूरत के मुताबिक इंश्योरेंस प्रोडक्ट चुनना चाहिए और टर्म प्लान का प्रीमियम कम होता है। यूलिप यानी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान का विकल्प भी मौजूद है। यूलिप में इन्वेस्टमेंट और इंश्योरेंस दोनों लाभ मिलता है। यूलिप के प्रीमियम में से खर्च काट लिए जाते हैं। यूलिप में 3 विकल्प होते हैं, इक्विटी फंड, बैलेंस फंड और मनी मार्केट फंड।


मनी मार्केट फंड में रिस्ट और रिटर्न कम होता है। बैलेंस फंड के जरिए इक्विटी और फिक्स्ड इनकम में निवेश किया जाता है। इक्विटी फंड में रिस्क और रिटर्न ज्यादा मुमकिन है। कॉस्ट के हिसाब से यूलिप महंगा प्रोडक्ट है। म्युचुअल फंड भी यूलिप जारी करते हैं। यूलिप इंश्योरेंस या म्युचुअल फंड कंपनियों से खरीदा जा सकता है। यूलिप में निवेश कम से कम 5 साल होना जरूरी है। 5 साल से पहले पैसा निकालने पर टैक्स बेनिफिट रिटर्न करना होगा।