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डिजिटल लेनदेन का कौन-सा तरीका होगा बेहतर

प्रकाशित Fri, 09, 2017 पर 17:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एचडीएफसी बैंक ने यूपीआई के इस्तेमाल से लेनदेन पर चार्जेस बढा दिए हैं। लेकिन डिजिटल प्लाटफॉर्म पर इन तमाम मनी ट्रांसफर के विकल्पों में से आपके लिए सही कौन सा है। एनईएफटी, आईएमपीएस या यूपीआई। इसी के साथ, क्रेडिट पॉलिसी में कोई बदलाव तो नहीं हुआ, लेकिन क्या अब आपको बदलनी चाहिए अपनी निवेश की रणनीति, आइए जानते हैं ऑप्टिमा मनी मैनेजर के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज मठपाल से।


क्या है यूपीआई
यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेज, ये लेनदेन का बेहद सुरक्षित तरीका है। इस ऐप को नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ने शुरू किया है। इससे मोबाइल के जरिए पैसे का लेनदेन मुमकिन होता है। इसमें वर्चुअल मोबाइल एड्रेस के जरिए लेनदेन कर सकते है। सिर्फ मोबाइल नंबर या आधार के जरिए लेनदेन मुमकिन है। यूपीआई में लेनदार के बैंक अकाउंट या आईएफएससी की जरूरत नहीं होती है। करीब 23 बैंकों में यूपीआई की सुविधा मौजूद है।


क्रेडिट पॉलिसी के बाद कहां करें निवेश
निवेशकों को क्रेडिट पॉलिसी के बाद निवेश के लिए एक से तीन साल की अवधि के शॉर्ट टर्म फंड चुनने चाहिए। अगर छोटी अवधि का निवेश है तो शॉर्ट टर्म एक्रुअल फंड फायदेमंद हो सकता है। निवेशक लंबी अवधि के लॉन्ग टर्म डेट फंड का चुनाव कर सकते हैं।


ब्याज दरें और डेट फंड के रिटर्न
डेट फंड के रिटर्न काफी हद तक ब्याज दरों पर निर्भर होते है। डेट फंड बॉन्ड में निवेश करते हैं। वहीं बॉन्ड के रिटर्न ब्याज दरों पर निर्भर करते हैं। दरें घटती हैं तो बॉन्ड की कीमत बढ़ जाती है। ब्याज दरें घटने पर ऊंची दरों पर जारी बॉन्ड की मांग बढ़ती है। वहीं ब्याज दरें बढ़ती हैं तो बॉन्ड की कीमत कम हो जाती है। ब्याज दरें बढ़ने पर निचली दरों पर जारी बॉन्ड की मांग कम हो जाती है।


सवालः ईएलएसएस में एसआईपी के जरिए निवेश करना है, कौन से फंड में निवेश करना चाहिए?


पंकज मठपालः ईएलएसएस में एसआईपी के जरिए निवेश करना है तो आप बिड़ला सनलाइफ टैक्स रिलीफ 96 फंड देख सकते हैं। इस फंड का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है। लॉन्च के बाद इस फंड ने 25.81 फीसदी सालाना रिटर्न दिए हैं।