योर मनीः कैसे करें बेफिक्र कैशलेस लेनदेन -
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योर मनीः कैसे करें बेफिक्र कैशलेस लेनदेन

प्रकाशित Sat, 10, 2016 पर 16:29  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

डिजिटल हो जाने की मुहिम जोर शोर से चल रही है। आलम ये है के जिन्होंने कभी भी डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन पेमेंट के बारें में सुना तक नहीं था, वो आज डिजिटल होना सीख रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है, के क्या हमारे पास डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इतना दुरूस्त है के हम आसानी और सुरक्षित तरिके से डिजिटल हो सकते हैं। पिछले तीन सालों में साइबर क्राइम 350 फीसदी बढे हैं। ऐसे में किस तरह की सावधानियां बरतकर आप डिजिटल हो सकते हैं, योर मनी में आज इसी पर बात करने के लिए जुडेंगे इंवेस्टमेंट एड्वाइजर किरण तेलंग और एसआईएसए इंफॉर्मेशन सिक्योरिटीज के बिजनेस हेड नितिन भटनागर


डिजिटल लेनदेन के फायदे


डिजिटल लेनदेन कम लागत के साथ इस्तेमाल में आसान है। इसके इस्तेमाल से रोजमर्रा के खर्च और निवेश में आसानी होगी। साथ ही पैसों के लेनदेन में तेजी आएगी और खर्च का रिकॉर्ड रखने में भी आसानी होगी। लेकिन साथ ही डिजिटल लेनदेन में गोपनीयता और सुरक्षा भी जरुरी होगी। डिजिटल लेनदेन रेलवे, एयरलाइन और बस की टिकट बुकिंग में मुमकिन है। वहीं टोल बूथ, रोजमर्रा के सामान की खरीदारी, टैक्सी और ऑटो का किराया, निवेश और बैंकिंग, टैक्स भुगतान, फीस भुगतान और बिल भुगतान में भी संभव है।


डिजिटल लेनदेन के फायदे तो कई है, लेकिन साथ ही खतरे भी कई ज्यादा है। हम देख रहे है कि साल दर साल साइबर क्राइम को लेकर केसेस बढ़ते ही जा रहे है। डिजिटल लेनदेन में आदमी जालसाजी में आसानी से फंस जाता है और फर्जी ई-मेल के जरिए गोपनीय जानकारी, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर जैसी जानकारी चुराई जाती है। ऑनलाइन शॉपिंग में ब्राउडर आपको फर्जी वेबसाइट पर ले जाता है और वो वेबसाइट आपकी गोपनीय जानकारी चुराती है। कभी ग्राहक और मर्चेंट्स के बीच हो रहे लेनदेन को हैक किया जाता है। हैकर लॉग इन और पासवर्ड की जानकारी चुराते हैं


डिजिटल लेनदेन में कैसे बचें धोखाधडी से


डिजिटल लेनदेन में इस तरह के साइबर फ्रॉड से बचने के लिए आपको सतर्क रहना चाहिए। ऑनलाइन भुगतान करते वक्त वेबसाइट पर पीसीआई-डीएसएस का सर्टिफिकेट देखना चाहिए। मोबाइल ऐप से भुगतान के वक्त पेसेक का लोगो देखें। पैसेक के लोगों पर क्लिक करने से वैधता सर्टिफिकेट दिखेगा। अनजान व्यक्ति के ई-मेल में आए लिंक और अटैचमेंट को ना खोलें। सिस्टम, मोबाइल में एंटी वायरस, स्पैम फिल्टर और एंटी स्पायवेयर लगाएं।


अपने अकाउंट बैलेंस को नियमित रूप से देखते रहे और अपने लॉग इन और सिक्योरिटी कोड किसी को ना बताएं। बैंक या वॉलेट कंपनियां कभी आपसे सिक्योरिटी कोड, पासवर्ड नहीं मांगती है। ऑनलाइन बैंकिंग का यूजर आईडी और पासवर्ड पेचीदा बनाएं। ऑनलाइन बैंकिंग करते वक्त ये जरूर देखें कि आखिरी बार कब लॉग इन किया था। मोबाइल ऐप को गूगल प्ले या ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें। मोबाइल ऐप को समय-समय पर अपडेट करते रहे और पब्लिक वाई-फाई पर मोबाइल वॉलेट, बैंकिंग ऐप ना खोलें।