योर मनी: जानिए एनसीडी की सभी बारीकियां -
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योर मनी: जानिए एनसीडी की सभी बारीकियां

प्रकाशित Tue, 02, 2016 पर 11:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

योर मनी पर आपको फाइनेंशियली फिट रखने के लिए हम तमाम गुरूमंत्र लेकर आते हैं। फिर चाहें आपकी प्लानिंग लेट से शूरू हो या फिर जल्दी। योर मनी के पास आपकी हर फाइनेंशियल दुविधा का सामाधान है। आपको ये समाधान देने के लिए हमारे साथ हैं ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के पंकज मठपाल। आज सबसे पहले हम बात करेंगे एनसीडी यानी नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर की।


एनसीडी का बाजार फिर गर्म हो रहा है। आने वाले दिनों में एनसीडी के कई इश्यू आएंगे। आपको बता दें कि जल्द ही डीएचएफएल का 4000 करोड़ रुपये का एनसीडी आने वाला वाला है जिसका ब्याज दर 9.1 फीसदी से लेकर 9.3 फीसदी तक रहेगा। इसमें एनसीडी के ब्याज को महंगाई से जोड़ने का विकल्प होगा। एक और कंपनी एचडीएफसी भी 2000 करोड़ रुपये का एनसीडी इश्यू लेकर आने वाली है। जिसकी ब्याज दर 8.15 फीसदी रह सकती है। वैसे 2-3 महीनों में बाजार में लगभग 25,000 करोड़ रुपये का एनसीडी इश्यू आने वाला है। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि एनसीडी क्या है? एनसीडी में निवेश के जोखिम क्या हैं, एनसीडी में निवेश के फायदे या नुकासान क्या हैं?


नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर या एनसीडी कर्ज जुटाने का एक जरिया है। आपको बता दें कि नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर शेयर तब्दील नहीं हो सकते। वहीं कन्वर्टिबल डिबेंचर शेयर में तब्दील हो सकते हैं। नॉन कन्वर्टिबल डिबेंचर वोटिंग का अधिकार नहीं होता और इन पर तयशुदा दर पर सालाना ब्याज मिलता है। एनसीडी में ब्याज को फिर से निवेश का भी विकल्प भी होता है। आमतौर पर एनसीडी में दूसरे विकल्पों के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिलता है और मैच्योरिटी पर निवेश किया हुआ पूरा पैसा मिलता है। एनसीडी के ब्याज पर टैक्स लगता है। ज्यादातर एनसीडी एक्सचेंज में लिस्ट होते हैं और इनको एक्सचेंज में खरीदा-बेचा जा सकता है।


एनसीडी जो तरह के होते हैं। इनमें से सिक्योर्ड एनसीडी में कंपनी जमानत के तौर पर संपत्ति रखती है जबकि अनसिक्योर्ड एनसीडी में कोई जमानती संपत्ति नहीं होती। एनसीडी खरीदने के लिए जो पैसा दिया जाता है उसे खरीद मूल्य कहा जाता है। एनसीडी की मैच्योरिटी के समय जो पैसा मिलता है उसे उसका फेस वैल्यू कहा जाता है। जबकि एनसीडी पर मिलने वाले ब्याज दर को कूपन रेट कहा जाता है।


बता दे कि एनसीडी के साथ कई जोखिम भी जुड़े रहते हैं। इसमें सबसे पहला है ब्याज से जुड़ा जोखिम और दूसरा है डिफाल्ट होने का जोखिम। इनसे बचने को लिए निवेशकों को अच्छी क्रेडिट रेटिंग वाले एनसीडी में निवेश करना चाहिए। ध्यान रखें कि कम रेटिंग वाले एनसीडी में डिफाल्ट का जोखिम ज्यादा रहता है। इसके साथ ही निवेशकों को अपने लक्ष्य, समयावधि और जोखिम क्षमता ध्यान में रखकर कर ही एनसीडी में निवेश करना चाहिए।


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