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सीखें निवेश की भाषा, बनाए बचत और निवेश में सुंतलन

प्रकाशित Fri, 18, 2018 पर 13:45  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एएमएफआई की रिपोर्ट के मुताबिक एसआईपी में लंबी अवधि के निवेशकों की संख्या में बढ़त दर्ज हुई है। मार्च 2018 में 58 फीसदी के इजाफे के साथ एसआईपी में 5 साल से ज्यादा रुकने वाले निवेशकों का आंकड़ा 2.11 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष के आखिरी तिमाही की बात करें तो कुल मिलाकर एसआईपी खातों में 15.91 लाख की बढ़त आयी है। योर मनी पर इसी पर चर्चा होगी जिसमें हमारा साथ देने के लिए मौजूद हैं एटिका वेल्थ मैनेजमेंट के निखिल कोठारी।


निखिल कोठारी का कहना है कि म्यूचुअल फंड को लेकर लोगों में जागरुकता और दिलचस्पी बढ़ी है। इसलिए फाइनेंशियल लक्ष्य हासिल करने में एसआईपी सक्षम रहा है, जिसके चलते 5 साल से ज्यादा टिकने वाले निवेशकों की संख्टया 58 फीसदी बढ़ी है। डायरेक्ट प्लान के खातों की संख्या 17.56 रही है।


एसआईपी यानि स्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान है जो कि नियमित निवेश का जरिया है। एसआईपी के जरिए कम से कम 100 रुपये की एसआईपी कर सकते है। इसमें निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। कम से कम 500 से 1000 का निवेश करे। फंड एसआईपी के पैसे बाजार में निवेश करता है।


इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। छोटी अवधि के निवेशकों को उतार-चढ़ाव से ज्यादा रिस्क है। एसआईपी उतार-चढ़ाव के रिस्क को कम करता है। एसआईपी से कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है और इसससे निवेश करना सुरक्षित होता है।


एसआईपी से शेयर, गोल्ड और म्यूचुअल फंड में निवेश करना संभव है। हर महीने आय से पैसा निवेश करना आसान होता है। एसआईपी बैंक में रिकरिंग डिपॉजिट करने जैसा ही है। आरडी के मुकाबले एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश पर फिक्स रिटर्न नहीं होता है।


बता दें कि एसआईपी महीने की 1, 7, 10, 14, 20, 25, 28 जैसी तारीखों को एसआईपी कटती है। 4-5 स्कीमों में निवेश होने पर हर फंड के लिए अलग-अलग तारीख चुनें।