योर मनीः डेट फंड निवेश में क्या हैं जोखिम? -
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योर मनीः डेट फंड निवेश में क्या हैं जोखिम?

प्रकाशित Fri, 17, 2017 पर 19:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अगर आप जोखिम नही उठा सकते तो हम अक्सर आपको डेट फंड में पैसे लगाने की सलाह देते है, लेकिन अगर वहां भी आपके निवेश पर आपको नुकसान हो, तब आप क्या करेंगें? योर मनी पर हम आपको डेट फंड में कैसे सावधानी से पैसे लगाएं इसी पर सलाह देंगें। आज हमारे साथ हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या।


आप अगर ये सोच रहे हैं की अचानक हम क्यों डेट फंड में निवेश से आपको सतर्क रहने को कह रहे हैं, तो इकी वजह है, टॉरस के फंड में गिरावट। जीं हां, टॉरस के 4 फंड की एनएवी 22 फरवरी को 7-12 फीसदी गिरी और ये हुआ, क्योंकि बल्लारपुर इंडस्ट्रीज की रेटिंग घटी दी गई। एक स्टॉक की रेटिग घटी देने से कैसे आपके फंड पर अगर पडता, इसी पर बात करते हैं।


फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या का कहना है कि डेट फंड में क्रेडिट रिस्क काफी अहम होता हैं। क्रेडिट रिस्क यानि डिफॉल्ट का जोखिम। डेट फंड बॉन्ड में निवेश करते हैं और बॉन्ड में डिफॉल्ट का जोखिम ज्यादा होता है। किसी कारण बॉन्ड की रेटिंग घटती है तो फंड की एनएवी गिरती है। हालांकि डिफॉल्ट होने पर फंड को राइट ऑफ करना होता है। फंड अगर बाद में पैसा वसूल कर पाते है तो एनवीए बढ़ जाती है। डेट फंड में ब्याज दरों में बदलाव का जोखिम भी काफी होता हैं।


अर्णव पंड्या के अनुसार डेट फंड में निवेश के बाद जल्द फायदे की उम्मीद ना रखें। इस फंड में निवेश करने के लिए कम से कम 3 साल का नजरिया रख निवेश करना सही होगा। निवेशकों को सलाह होगी कि इसमें होने वाले छोटी अवधि के नुकसान से घबराएं नहीं।  म्युचुअल फंड डेट में निवेश का सबसे अच्छा जरिया हैं।


सावलः टैक्स बचाने के लिए 5 फंड में 1 लाख रुपये का निवेश करना है, कौन से फंड में निवेश करना बेहतर होगा?


अर्णव पंड्याः टैक्स छूट के लिए ईएलएसएस फंड में निवेश करें। इसके लिए आपको 5 ईएलएसएस फंड में निवेश करने की जरुरत नहीं है। आप एक्सिस लॉन्ग टर्म इक्विटी फंड और फ्रैंकलिन इंडिया टैक्स शील्ड फंड में निवेश कर सकते हैं।


सवालः बीएनपी पारिबा इक्विटी फंड, एडेलवाइस मिड एंड स्मॉलकैप फंड और फ्रैंकलिन इंडिया हाई ग्रोथ फंड में निवेश किया हैं। साथ ही अन्य कई फंड में निवेश किया है, क्या पोर्टफोलियो में चुने हुए फंड सही हैं?


अर्णव पंड्याः निवेश पोर्टफोलियो में जरूरत से ज्यादा फंड हैं जिसे कम करने की जरुरत हैं। बीएनपी पारिबा इक्विटी फंड, टाटा बैलेंस फंड, एडेलवाइस स्मॉल एंड मिडकैप फंड, मिरे एसेट इंडिया ऑप. फंड और  फ्रैंकलिन इंडिया हाई ग्रोथ कंपनीज से निकलने की सलाह होगी।