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योर मनीः टैक्स छूट के लिए यूलिप या ईएलएसएस

प्रकाशित Fri, 02, 2017 पर 18:06  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स सेविंग की जब बात आती है, तो हम केवल 80सी की लिमिट को पूरा करने के चक्कर में, कौन सा निवेश विकल्प हमारे लिए सही है, कौन सा नहीं, ये सोचना भूल जाते हैं, या समझ नहीं होने पर, हम गलत प्रोडक्ट में निवेश कर जाते हैं। लेकिन योर मनी में हम आपको ना सिर्फ सही टैक्स सेविंग निवेश विकल्प के बारे में बताएंगे बल्कि इसमें निवेश कैसे करें, इसकी राह से भी रूबरू करवाएंगे। हम बात कर रहे हैं इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम और यूलिप की। ईएलएसएस कैटेगरी के टैक्स सेविंग निवेश के बारें में तो हम सब जानते हैं, लेकिन बिना हिचकिचाहट के निवेश करना अभी भी थोड़ा मुश्किल होता है।


बता दें कि 80सी के तहत निवेश पर करने पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट हासिल होती है, जबकि 80सीसीडी के तहत एनपीएस के लिए 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है। 80सी में निवेश के विकल्प के तौर पर लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, नॉन कम्युटेबल डेफेर्ड एन्युटी, पीपीएफ, रिटायरमेंट फंड, एनएससी, सुकन्या समृद्धि योजना, यूलिप, नोटिफाइड एन्युटी प्लान, म्युचुअल फंड, यूटीआई यूनिट, पेंशन फंड, होम लोन अकाउंट स्कीम, हाउसिंग बोर्ड की स्कीम, होम लोन प्रिंसिपल, ट्यूशन फीस, इंफ्रा इक्विटी और बॉन्ड, 5 साल का फिक्स्ड डिपॉजिट, नाबार्ड के बॉन्ड, सीनियर सिटीजन स्कीम और पोस्ट ऑफिस की 5 साल की एफडी शामिल हैं।


वहीं टैक्स छूट के लिए ईएलएसएस सबसे अच्छा विकल्प है। ईएलएसएस के जरिए बचत के साथ इक्विटी में निवेश का विकल्प मिलता है। जोखिम लेने वालों के लिए ईएलएसएस अच्छा विकल्प है। ईएलएसएस में लिक्विडिटी और पारदर्शिता होती है। पिछले 3 साल में ईलएसएस के रिटर्न 17.8 फीसदी के आसपास रहे हैं। ईएलएसएस में 3 साल का लॉक इन पीरियड होता है। ईएलएसएस में सबसे कम लॉक इन पीरियड होता है। टॉप ईएलएसएस फंड में डीएसपी ब्लैकरॉक टैक्स सेवर, प्रिंसिपल टैक्स सेविंग फंड, एचडीएफसी लॉन्ग टर्म एडवांटेज फंड, कोटक टैक्स सेवर स्कीम और एलएंडटी टैक्स एडवांटेज फंड शामिल हैं।


अब बात यूलिप की, यूलिप यानि यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान। यूलिप में इंश्योरेंस और निवेश एक साथ होता है। यूलिप में प्रीमियम का कुछ हिस्सा इंश्योरेंस के लिए कटता है, जबकि प्रीमियम का बाकी हिस्सा निवेश होता है। यूलिप के तहत इक्विटी, डेट और बैलेंस फंड में निवेश का विकल्प दिया जाता है।


जानकारों का कहना है कि यूलिप के मुकाबले ईएलएसएस में रिटर्न ज्यादा मुमकिन है। साथ ही ईएलएसएस में ज्यादा लिक्विडिटी और पारदर्शिता होती है। वहीं यूलिप में 5 साल का लॉक इन पीरियड है, लेकिन ईएलएसएस में 3 साल का ही लॉक इन पीरियड होता है। यूलिप में निवेश ज्यादा खर्चीला होता है। यूलिप का इंश्योरेंस टर्म प्लान के मुकाबले महंगा होता है।