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योर मनीः दरों में कटौती के बाद कहां करें निवेश

प्रकाशित Tue, 04, 2016 पर 19:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नए आरबीआई गवर्नर ऊर्जित पटेल ने दिवाली गिफ्ट दिया है। आरबीआई  ने रेपो रेट को एक चौथाई फीसदी घटा दिया है। अब नया रेपो रेट 6.25 फीसदी हो गया है। इसका मतलब ये कि अब बैंकों को आरबीआई से सस्ता कर्ज मिल सकेगा और उम्मीद की जा सकती है कि वो उसका फायदा ग्राहकों तक भी पहुंचाएंगे।


ऊर्जित पटेल की गवर्नर बनने के बाद ये पहली क्रेडिट पॉलिसी है। साथ ही ये पहली क्रेडिट पॉलिसी है जिसमें ब्याज दरों को तय करने में मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की भूमिका रही है। तो ऐसे में योर मनी पर आज हम आपको समझाएंगें, कैसे आप इस रेट कट का फायदा उठा सकते हैं, कैसे आपके निवेश और कर्ज पर इस कट का असर पडेगा। आज क्रेडिट पॉलिसी दरों में कटौती पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या।


बता दें कि आरबीआई ने नीतिगत दरों में 0.25 फीसदी की कटौती करना का एलान किया है। इस तरह, 0.25 फीसदी की कटौती के बाद रेपो रेट 6.5 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी हो गया है। इसका मतलब ये कि अब बैंकों को आरबीआई से सस्ता कर्ज मिल सकेगा और उम्मीद की जा सकती है कि वो उसका फायदा ग्राहकों तक भी पहुंचाएंगे। ऊर्जित पटेल की गवर्नर बनने के बाद ये पहली क्रेडिट पॉलिसी है। साथ मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी बनने के बाद भी ये पहली क्रेडिट पॉलिसी है। मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की अगली बैठक 6-7 दिसंबर को होगी।


वहीं रिवर्स रेपो रेट 6 फीसदी से घटकर 5.75 फीसदी हो गया है। रिवर्स रेपो पर ही बैंक अपना पैसा आरबीआई के पास रखते हैं। आरबीआई ने सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया है और ये 4 फीसदी पर कायम है। आरबीआई ने दिसंबर 2016 तक महंगाई दर 5 फीसदी रहने का अनुमान दिया है। मार्च 2017 तक महंगाई दर 5.3 फीसदी रहने का अनुमान दिया है, जबकि मार्च 2018 तक महंगाई दर 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है।


आरबीआई ने वित्त वर्ष 2017 के लिए जीवीए ग्रोथ 7.6 फीसदी रहना बरकरार है, जबकि वित्त वर्ष 2018 के लिए जीवीए ग्रोथ 7.9 फीसदी रहने का अनुमान दिया है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2018 के ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखा है लेकिन जोखिम बढ़ गया है।


अर्णव पंड्या का कहना है कि क्रेडिट पॉलिसी के बाद ब्याज दरों में आगे और कटौती के आसार है। और फिक्स इनकम वाले निवेश पर ब्याज घटेगा। नई क्रेडिट पॉलिसी बैंक डिपॉजिट में निवेश अब आकर्षक नहीं रहा है। ब्याज दरों में कटौती के चलते रेगुलर इनकम विकल्पों में निवेश की समीक्षा करनी चाहिए। ब्याज ज्यादा हो तो कुछ समय के लिए एफडी कर सकते हैं। छोटी बचत योजनाओं का ब्याज अगली तिमाही में और घटेगा। 3 महीने के लिए छोटी बचत योजनाओं में निवेश कर सकते हैं।


अर्णव पंड्या के मुताबिक जोखिम लेने की क्षमता है तो एनसीडी में निवेश कर सकते हैं और लंबी अवधि के लिए टैक्स फ्री बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। डेट म्युचुअल फंड में अभी भी निवेश का मौका है और लॉन्ग टर्म इनकम फंड में भी निवेश किया जा सकता है। छोटी अवधि के लिए शॉर्ट टर्म फंड में निवेश कर सकते हैं।


नए क्रेडिट पॉलिसी में छोटी बचत योजनाओं की नई दरें लागू किए गए है। जिसके तहत पीपीएफ में 8 फीसदी और एनएसएस में 8 फीसदी ब्याज दर लागू होगा। किसान विकास पत्र योजना पर ब्याज दर को 7.8 से घटाकर 7.7 फीसदी कर दिया गया है। पंच वर्षीय सीनियर सिटिजन स्कीम और पंच वर्षीय नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट योजनाओं पर भी ब्याज दरों में कटौती की गई है। इसे 8.6 फीसदी से घटाकर 8.5 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा सुकन्या समृद्धी योजना पर ब्याज दर 8.5 फीसदी कर दिया गया है, पहले ये 8.6 फीसदी था। पोस्टल डिपॉजिट 5 साल की योजना पर 7.8 फीसदी ब्याज दरें लागू हुई है।


ब्याज दरों में कटौती से कर्ज सस्ता होगा। खास तरह के कर्ज की दरों में ज्यादा कटौती होगी लेकिन कटौती का असर दिखने में वक्त लगेगा।


आइए अब हम देखते हैं कि दरों में इस कटौती के बाद हमारे लोन की स्थिति क्या होगी। अभी अगर हम 20 साल के लिए 20 लाख रुपये का लोन लेते हैं तो हमें 9.50 फीसदी ब्याज दर पर 18643 रुपये की ईएमआई देनी होती है। वहीं अगर अब बैंक दरों में 0.25 फीसदी के इस कट को ग्राहकों को पास ऑन कर देते हैं तो 20 साल के लिए 20 लाख रुपये के लोन पर 9.25 फीसदी ब्याज दर पर 18317 रुपये ईएमआई देनी होगी। इस तरह हर महीने 326 रुपये और पूरे साल में 3912 रुपये की बचत होगी।


इसी तरह अगर हम अभी 5 साल के लिए 5 लाख रुपये का कार लोन लेते हैं तो हमें 10.25 फीसदी ब्याज दर पर 21371 रुपये की ईएमआई देनी होती है। वहीं अगर अब बैंक दरों में 0.25 फीसदी के इस कट को ग्राहकों को पास ऑन कर देते हैं तो 5 साल के लिए 5 लाख रुपये के कार लोन पर 10 फीसदी ब्याज दर पर 21248 रुपये ईएमआई देनी होगी। इस तरह हर महीने 123 रुपये और पूरे साल में 1476 रुपये की बचत होगी।