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जीएसटी से हाइब्रिड कारों की हवा खराब

प्रकाशित Fri, 07, 2017 पर 19:41  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकारी नीतियों में बार-बार बदलाव से हाइब्रिड कार निर्माता परेशान हैं। देश की बड़ी कार कंपनियों का कहना है कि बार-बार नीतियों में बदलाव से उनकी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और अगर ऐसा ही चलता रहा तो उन्हें दोबारा सोचना पड़ेगा कि वे इस सेक्टर में और निवेश करें या नहीं।


हाइब्रिड कारों पर 28 फीसदी जीएसटी लगने के कारण इनकी कीमतों में उछाल आया है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति की हाईब्रिड सियाज और इरटिगा की कीमतों में तो 1 लाख तक बढ़ोतरी हुई है और ये पहली बार नहीं कि हाइब्रिड गाड़ियों पर मार पड़ी है। इससे पहले सरकार ने सभी माइल्ड हाइब्रिड्स को मिलने वाली सब्सिडी बंद कर दी थी। इन नीतियों को देखते हुए अब कंपनी हाइब्रिड में निवेश को लेकर सोच में पड़ गई है।


महिन्द्रा ने भी कहा कि वो अपनी हाइब्रिड गाड़ियों का लॉन्च रोक सकती है। इतना ही नहीं कंपनी स्कॉर्पीयो हाइब्रिड को धीरे-धीरे फेज आउट कर देगी। जर्मन लग्जरी कारमेकर बीएमडब्ल्यू ने कहा है कि जीएसटी के बाद हाइब्रिड की राह चलना मुश्किल है। उधर टोएटा कैमरी हाइब्रिड का प्रोडक्शन रोकने की तैयारी में है। ह्युंदई के सूत्र बताते हैं कि 2018-20 के बीच तीन हाइब्रिड गाड़ियों की लॉन्च में देरी हो सकती है। उधर एकॉर्ड हाइब्रिड  बनाने वाली होंडा भी अपने हाइब्रिड पॉलिसी की समीक्षा कर रही है। आपको बता दें कि हाइब्रिड गाड़ियों पर जीएसटी के बाद करीब 43 फीसदी टैक्स लग रहा है। इन कंपनियों की मांग है कि सरकार हाइब्रिड कारों पर जीएसटी रेट को रिव्यू करे। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि दरों की कोई समीक्षा नहीं होगी।


आपको बता दें कि हाइब्रिड कारें बैटरी और पेट्रोल-डीजल दोनों पर चलती हैं। सरकार चाहती है कि सिर्फ बैटरी वाली इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा दिया जाए ताकि पर्यावरण को फायदा हो। इस संबंध में नीति नवंबर में आने वाली है।