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आवाज अड्डाः चीन का बड़ा प्रोजेक्ट, आर्थिक कूटनीति का मुकाबला कैसे करें भारत!

प्रकाशित Wed, 17, 2017 पर 20:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

चीन दुनिया का नया नक्शा खींचने की कोशिश में जुटा है। इस नक्शे की खासियत यही है कि इसमें चीन ही दुनिया का केंद्र होगा। और इस नक्शे पर जो सबसे मोटी लकीर नजर आएगी वो होगी ओबीओआर या वन बेल्ट वन रोड नाम का एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट। चीन का कहना है कि वो सदियों पुराने एतिहासिक सिल्क रूट को दोबारा खोलना चाहता है। चीन से पश्चिम एशिया, अफ्रीका और योर तक सीधे सड़क का रास्ता खोलना इस प्रोजेक्ट की बुनियाद है। और यही भारत के लिए एक बड़ी चिंता की वजह है।


वजह ये कि इसकी जो सड़क चीन और पाकिस्तान को जोड़ती है वो भारत की उस ज़मीन से गुजरती है जिसपर चीन और पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है। इसीलिए भारत इस प्रोजेक्ट को अपनी संप्रभुता या सॉवरेनटी पर खतरा मानता है। इसीलिए भारत ने चीन के बुलावे पर बीजिंग में हुए वन बेल्ट वन रोड सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। क्या है ये प्रोजेक्ट, कैसे इसके जरिए चीन भारत को परेशान कर सकता है, और मुकाबले के लिए भारत को क्या करना चाहिए।


ओबीओआर का मतलब वन बेल्ट, वन रोड। यह प्रोजेक्ट चीन को एशियाई, अफ्रीकी और यूरोपीय देशों से जोड़ेगा। योजना में सड़क और समुद्री मार्ग शामिल किया जाएगा। पुराने सिल्क रूट को फिर से सक्रिय करने की तैयारी है। इस प्रोजेक्ट के तहत सड़कें, रेल मार्ग, बंदरगाह, सुरंगें बननी हैं।


वन बेल्ट, वन रोड में करीब $5 लाख करोड़ का प्रोजेक्ट में निवेश करना होगा। 5 साल में चीन की $800 करोड़ निवेश की योजना है जिसमें एशिया, यूरोप, अफ्रीका के 60 से ज्यादा देश शामिल है। ओबीओआर में भारत के 6 पड़ोसी देश शामिल होगा। चीन के राष्ट्रपति ने ओबीओआर को प्रोजेक्ट ऑफ सेंचुरी बताया।


ओबीओआर के तहत चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर बनाना चाहता है। जहां 3000 किलोमीटर लंबा चीन-सिंगापुर हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट शुरु किया जा सकेगा। वहीं केंद्रीय एशिया में गैस पाइपलाइन,  चीन-मंगोलिया-रूस इकोनॉमिक कॉरीडोर और लाओस-बीजिंग रेल प्रोजेक्ट बनाने की योजना है।


ओबीओआर से भारत की परेशानी यह है कि चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना होगा। सीपीईसी का बड़ा हिस्सा पाक अधिकृत पाकिस्तान में है और भारत का हिस्सा है पाक अधिकृत कश्मीर। भारत ने संप्रभुता का हवाला देकर इसका विरोध किया है। ओबीओआर से चीन का वर्चस्व बढ़ेगा।


14-15 मई को ओबीओआर समिट सम्मेलन बीजिंग में हुआ था। इस समिट में 100 से ज्यादा देश सम्मेलन में शामिल हुए थे। जिसमें 29 देशों के राष्ट्राध्यक्ष सम्मेलन में शामिल हुए लेकिन 
भारत ने ओबीओआर सम्मेलन का बहिष्कार किया।