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आवाज़ अड्डाः विद्यालय की प्रार्थना पर विवाद, खत्म होगा नियम!

प्रकाशित Thu, 11, 2018 पर 20:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

स्कूल में सुबह होने वाली प्रार्थना को क्या किसी एक धर्म का प्रचार माना जा सकता है। सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय विद्यालयों में होने वाली प्रार्थना पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने जिस याचिका पर नोटिस दिया है उसमें केंद्रीय विद्यालय की प्रार्थना पर रोक लगाने की मांग की गई है, क्योंकि रोज सुबह गाई जाने वाली इस प्रार्थना में हिंदू धर्म से जुड़े श्लोक शामिल हैं और प्रार्थना को सभी छात्रों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। कहा गया है कि ये देश के संविधान के खिलाफ है। इतना ही नहीं याचिका में ये भी कहा गया है कि रोज सुबह ईश्वर की प्रार्थना से शुरुआत करने के बाद बच्चों में वैज्ञानिक सोच कैसे पैदा होगी।


केंद्रीय विद्यालय में रोज सुबह की प्रार्थना प्रसिद्ध वैदिक मंत्र तमसो मा ज्योतिर्गमय से शुरू होती है, उसके बाद हिंदी में प्रार्थना गाई जाती है। और फिर ऊं शांति मंत्र के साथ प्रार्थना समाप्त होती है। अप्रैल 2013 में केंद्रीय विद्यालय के रिवाइज्ड एजुकेशन कोड में इसे सभी छात्रों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह मंत्रोच्चार करवाना हिंदू धर्म की शिक्षा देने जैसा है, जबकि संविधान के मुताबिक पूरी तरह सरकारी खर्च पर चलने वाले स्कूलों में खास धर्म से संबंधित शिक्षा नहीं दी जा सकती। 


सुप्रीम कोर्ट के सवाल पूछने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा होने लगी है। विपक्ष की पार्टियां इसे गंभीर मामला बता रही हैं।


सवाल उठता है कि क्या अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने और भाईचार बढ़ाने की बात करने वाले मंत्र हिंदू धर्म की शिक्षा देते हैं, जिसपर दूसरे धर्मों को ऐतराज हो सकता है? क्या कोई भी प्रार्थना पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष हो सकती है? ऐसे में सवाल उठता है कि क्या स्कूलों में प्रार्थना करवाने का नियम ही खत्म कर देना चाहिए?