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आवाज़ अड्डा: अब पाकिस्तान में आतंकवादी करेंगे राज!

प्रकाशित Sat, 05, 2017 पर 15:09  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पाकिस्तान में कब क्या हो जाए कहा नहीं जा सकता। पिछले शुक्रवार को भ्रष्टाचार और गलत जानकारी देने के आरोप में नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी और 8 दिन के भीतर अब खबर है कि खूंखार आतंकवादी हाफिज सईद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। सईद ने एक नई पार्टी बनाई है जिसका नाम है मिल्ली मुस्लीम लीग और पार्टी का नारा है, हमारी सियासत, इंसानियत की खिदमत। हाफिज के लिए इंसानियत की खिदमत का क्या मतलब है और अगर वो राजनीतिक ताकत जुटा पाएगा तो उसका क्या इस्तेमाल करेगा, ये समझा जा सकता है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नजरिए ये ना सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व समुदाय के लिए चिंता की बात है। आवाज़ अड्डा में आज इसी पर चर्चा होगी, लेकिन उससे पहले देखते हैं कि हाफिज का असली चेहरा क्या है और पाकिस्तान ने उसे क्या हैसियत दे रखी है।


हाफिज सईद, लश्करे तैबा का संस्थापक, जमात उद दावा का सरगना, 2001 के संसद हमले का आरोपी, 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों का आरोपी, 2008 में मुंबई 26/11 हमले का मास्टरमाइंड, इसी ने 26/11 की पूरी प्लानिंग की, आतंकवादियों को ट्रेनिंग दिलाई, डेविड हेडली के जरिए मुंबई की रेकी कराई और यही हमले के वक्त आतंकवादियों को हिदायत भी दे रहा था। और भारत का दुश्मन आज भी पाकिस्तान में चैन से बैठकर जेहाद की आग भड़का रहा है। इतना ही नहीं, अब हाफिज सईद पाकिस्तान में चुनाव लड़कर अपनी सरकार बनाना चाहता है। इसने मिल्ली मुस्लीम लीग के नाम से पॉलिटिकल पार्टी बनाई है और पाकिस्तान के इलेक्शन कमीशन को रजिस्ट्रेशन के लिए अर्जी दी है। भारत ने साफ किया है कि हाफिज राजनीति को ढाल बनाना चाहता है और ऐसे ग्लोबल टेरेरिस्ट और उसके संगठनों पर रोक लगाना पाकिस्तान का दायित्व है।


साफ है कि नवाज शरीफ के हटने से पैदा हुई अस्थिरता में हाफिज अपने लिए मौका देख रहा है जो पाकिस्तान की अपनी ही बोई हुई फसल है। अंतर्राष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान ने हाफिज को बार-बार नजरबंद तो किया लेकिन सिर्फ नाम के लिए। असल में इसे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से भी ज्यादा सिक्योरिटी में रखा जाता है। वहां की सेना और खुफिया एजेंसी आीएसआई से इसके गहरे रिश्ते हैं। ये वहां खुलेआम घूमता फिरता है, जेहाद की तकरीरें करता है। बच्चों अनाथों और विस्थापितों के बीच सामाजसेवा करता है।


हाफिज ही नहीं दाउद इब्राहिम, सैयद सलाहुद्दीन, जकीउर्र रहमान लखवी जैसे भारत के 50 से ज्यादा मोस्ट वांटेड आतंकवादियों ने पाकिस्तान में शरण ले रखी है। पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में अल कायदा, जैशे मोहम्मद, लश्करे तैयबा जैसे पचासों खतरनाक आतंकी सगंठनों ने कैंप बना रखे हैं। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ना सिर्फ इन्हें पालते हैं बल्कि ट्रेनिंग, साजो-सामान और लॉजिस्टिक्स मुहैया कराते हैं। मगर हाफिज सईद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब पाकिस्तान में आतंकवादी सरकार पर भी कब्जा करना चाहते हैं? आखिर किसकी मदद से उनका हौसला इतना बुलंद हो रहा है!