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आवाज़ अड्डाः देश के इतिहास की अनोखी घटना, जजों ने मांगा इंसाफ

प्रकाशित Fri, 12, 2018 पर 20:45  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सुप्रीम कोर्ट के 4 सीनियर जजों ने देश के लोगों से न्यायपालिका की रक्षा की गुहार लगाई है। जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ ने प्रेस क्रॉन्फ्रेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा उनकी बात से सहमत नहीं हैं। इसके बाद इन जजों ने वो चिट्ठी भी सार्वजनिक की जो उन्होंने चीफ जस्टिस को लिखी थी। जजों की बातों और चिट्ठी से अब तक यही समझ में आ रहा है कि उन्हें चीफ जस्टिस के कामकाज के तरीके पर आपत्ति है।


चीफ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक प्रमुख हैं और वही ये फैसला करते हैं कि किस मामले की सुनवाई कौन से जज या कोर्ट के हवाले की जाए। 4 जजों का कहना है इस काम को करते वक्त चीफ जस्टिस मान्य परंपराओं को तोड़ रहे हैं। चूंकि चीफ जस्टिस सीनियर मोस्ट जजों की भी नहीं सुन रहे हैं इसलिए उनके पास प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। जजों की इस प्रेस कॉन्फेंस के बाद न्याय व्यवस्था को जानने वालों में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।


देश की न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार आज सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यापालिका की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट में सबसे वरिष्ठ 4 जजों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है। इतना ही नही, जजों का कहना है कि उन्होंने मुख्य न्यायधीश को इस बारे में कई बार लिखित में जानकारी दी लेकिन उनकी बात सुनी नहीं गई। जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी।


जजों ने चीफ जस्टिस को लिखी चिट्ठी मीडिया को देते हुए कहा कि आज देश का लोकतंत्र खतरे में है। और कल कोई ये न कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी है इसलिए हम मीडिया के सामने आए हैं। जजों ने कहा कि जब तक इस संस्था को बचाया नहीं जा सकता, लोकतंत्र को नहीं बचाया जा सकता।


वहीं पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के जजों के मीडिया के सामने आने को बहुत बड़ा कदम बताया है और कहा कि संस्थाओं को जो नुकसान हो चुका उसे अब पटरी पर लाने की जरूरत है। जबकि बीजेपी सांसद सुब्रमणियन स्वामी ने कहा कि ये मामला काफी गंभीर है और प्रधानमंत्री को दखल देना चाहिए।