आवाज अड्डाः हालात बदतर, कश्मीर के मोर्चे पर मोदी सरकार की नीति रही नाकाम! -
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आवाज अड्डाः हालात बदतर, कश्मीर के मोर्चे पर मोदी सरकार की नीति रही नाकाम!

प्रकाशित Tue, 18, 2017 पर 20:54  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

9 अप्रैल के श्रीनगर बायपोल चुनाव के बाद कश्मीर में हालात बिगड़े हुए है। स्थिती यहां तक खराब हो गयी है कि सोमवार को कश्मीरी छात्र सुरक्षा कर्मियों से भिड़ने लगे। कॉलेज, युनिवर्सिटी बंद है, इंटरनेट - मोबाइल पर पाबंदी है और जम्मू-कश्मीर की सरकार कुछ समय के लिए फेसबुक-व्हॉटसैप पर रोक लगाने पर विचार भी कर रही है। इन बिगड़ते हालात में एक कारण है तरह तरह के विडियो जो वायरल हो गए है। एक विडियो में सीआरपीएफ जवान पर अलगाववादियों के हमलें दिखाई दिए तो दूसरे विडियों में कश्मीरी युवा को सेना के जीप पर बंधा हुआ दिख रहा है। इन विडियो वॉर के बीच में जम्मू कश्मीर की सरकार बिलकुल बेबस नजर आती है।


आज महबूबा मुफ्ती सरकार ने हालात पर चर्चा के लिए कैबिनेट बैठक बुलाई जिसके बाद सब से शांति बनाए रखने की अपील की गई। जाहिर है इस समय सिर्फ शांति की अपील कर के बात नहीं बनने वाली। पुलवामा में एक कॉलेज में पुलिस बल ने घुसकर एक लड़के को जमकर पीटा था। वहीं हिंसक भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए अब प्लास्टिक बुलेट का इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्र सरकार की और से 1000 प्लास्टिक बुलेट कश्मीर घाटी में भेजी जा चुकी हैं। सुरक्षाबलों को आदेश दिया है कि पैलेट गन का इस्तेमाल आखिरी विकल्प के तौर पर करें। इंटरनेट सेवा पर रोक लगाने के बाद कश्मीरी प्रशासन ने घाटी में सभी स्कूल-कॉलेजों को भी बंद करने का आदेश दिया है।


कश्मीर के हालात पर आर्मी चीफ ने एनएसए को जानकारी दी थी।  सरकार अब पत्थरबाजी के लिए उकसा रहे व्हाट्सऐप ग्रुप पर कड़ी नजर रख रही है। दक्षिण कश्मीर में रहने वाले सभी पुलिसकर्मियों को कुछ महीनों तक घर ना जाने की सलाह दी गई है। इसी बीच आईबी पाकिस्तानी हैंडलर्स ने पत्थरबाजों को सुरक्षा बलों पर पेट्रोल बम से हमला करने के निर्देश दिए है।


दरअसल कश्मीर की स्थिति का कारण का पुलवामा डिग्री कॉलेज की घटना है। शनिवार को पुलवामा डिग्री कॉलेज में सेना दाखिल हुई थी और कॉलेज के छात्रों ने सेना का विरोध किया था। विरोध के दौरान छात्रों ने पुलिस और सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी की। जिसके बाद सेना की जवाबी कार्रवाई में 20 छात्र घायल हुए। छात्रों ने कुलगाम, शोपियां, बिजबेहाड़ा, अनंतनाग, बड़गाम, बारामुला, कुपवाड़ा में प्रदर्शन किया। सबसे ज्यादा हिंसा श्रीनगर और सोपोर में किया गया।


कश्मीर समस्या के और जटिल होने के संकेत है। श्रीनगर लोकसभा सीट पर सिर्फ 7 फीसदी मतदान हुए है जबकि श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में 12.5 लाख से ज्यादा वोटर है। लेकिन सिर्फ 90 हजार लोगों ने वोटिंग की है। पुनर्मतदान में तो केवल 2 फीसदी वोटिंग दर्ज हुई और 70 फीसदी पोलिंग बूथ खाली पड़े रहे। श्रीनगर उपचुनाव में 8 लोग मारे गए थे और 200 से ज्यादा हिंसक घटनाएं हुईं है। सन 1999 में सबसे कम 12 फीसदी वोटिंग हुई थी। राज्य में पीडीपी-बीजेपी सरकार की लोकप्रियता घटी है वहीं आतंकवादी गतिविधियों में इजाफा देखा गया है।


सवाल है कि कश्मीर में ऐसे खराब हालात एक बार फिर क्यों पैदा हो गए है। श्रीनगर बायपोल में 30 साल के सबसे कम वोटर टर्नआउट क्यों दिखे। कश्मीर पर मोदी सरकार की नीति क्या है और क्या ये काम कर रही है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या और सख्ती की जरूरत है।