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आवाज़ अड्डा: यूपी चुनाव में बीजेपी का डंका, क्या हैं संकेत!

प्रकाशित Sat, 02, 2017 पर 15:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव में बीजेपी ने कुछ उसी तरह की जीत दर्ज की है जैसा करीब 9 महीने पहले विधानसभा चुनाव में हुआ था। 16 में से 14 मेयर के पदों पर कब्जा और महानगर पालिकाओं से लेकर नगर पंचायतों तक भगवा ही भगवा। अगर माना जाए कि विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश ने नोटबंदी की आलोचनाओं को खारिज किया तो ये भी मानना पड़ेगा कि यूपी के शहरों ने इस बार जीएसटी को थम्स अप दे दिया है। कांग्रेस और एसपी के लिए तो ये साफ तौर पर चिंता की बात है। लेकिन शहरी इलाकों में मायावती का प्रदर्शन थोड़ा हैरान करने वाला है।


उत्तर प्रदेश बीजेपी को 2014 से लगातार जश्न मनाने के मौके दे रहा है। पहले लोकसभा में 80 में से 71 सीटें दीं, फिर असेंबली के चुनाव में 403 में से 324 सीटें और अब 16 में 14 मेयर समेत शहरी निकायों में जबर्दस्त जीत। अब योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि ये उत्तर प्रदेश की जनता का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों पर भरोसे का नतीजा है और जीत का सिलसिला 2019 तक जाएगा।


लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक विपक्ष की कोई भी घेराबंदी सफल नहीं हुई और हर मुद्दा फेल हुआ है। ना तो नोटबंदी का मुद्दा बीजेपी को झटका दे पाया और ना जीएसटी पर हमले काम आए। कांग्रेस और एसपी का गठबंधन काम नहीं आया और बीएसपी को साथ लेने की सूरत ही नहीं बन पाई। कांग्रेस यूपी की हार को ढंकने के लिए चित्रकुट विधानसभा उपचुनाव और पंजाब के गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव का हवाला दे रही है। और कह रही है कि बीजेपी ने यूपी निकाय चुनाव नतीजों का फायदा उठाने के लिए ही गुजरात चुनावों में देरी करवाई।


विधानसभा चुनाव में एनडीए को 41 फीसदी, कांग्रेस-एसपी गठबंधन को 28 फीसदी और बीएसपी को 22 फीसदी वोट मिले थे। जबकि लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 42 फीसदी, एसपी को 22 फीसदी, बीएसपी को 19 फीसदी और कांग्रेस को 7 फीसदी वोट मिले थे। दोनों ही चुनावों को देखें तो बीजेपी को रोकने का एकमात्र रास्ता विपक्षी वोटों को एकजुट करने में ही दिखता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 2019 में एसपी, बीएसपी और कांग्रेस के मिले बगैर बीजेपी को हराना संभव हो पाएगा!