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आवाज़ आंत्रप्रेन्योरः इंकलव बना दिव्यांगों का जीवनसाथी

प्रकाशित Sat, 12, 2017 पर 13:04  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिल्ली की अंजलि मेहता हमेशा से ही बहुत शांत और अकेले रहने की आदी रही हैं। किसी से ज्यादा बात न करने और घुल मिल न पाने की वजह से उनके लिए दोस्त बना पाना काफी मुश्किल था। लेकिन इस मुश्किल को आसान बनाया उनके परिवार और इंकलव ऐप ने।


ऐप पर लोगों से बात करने से शुरूआत के बाद अंजलि का आतमविश्वास बढ़ा। उन्होंने इंकलव की सोशल स्पेस पार्टी में जाना शुरू किया। यहां अंजलि ने दोस्त तो बनाए ही, साथ ही ये भी जाना कि वो किसी से कम नहीं हैं।


इंकलव- यानी इनक्लूसिव लव, सभी को प्यार तलाशने का बाराबर मौका देने के मकसद से ही कल्याणी खूणा ने इंकलव की शुरुआत की। 2014 में 100 लोगों से शुरु हुआ ये सफर आज करीब 20 हजार दिव्यांगों तक पहुंच चुका है।


मैचमेकिंग के लिए बनी दूसरी वेबसाइट्स और ऐप पर दिव्यांगों के मुताबिक प्रोफाइल और डाटाबेस नहीं होता। इससे उनके लिए पार्टनर ढूंढने का ये तरीका नाकाम साबित होता है। इंकलव ऐप पर इसी बात को ध्यान में रखा गया है। इस ऐप पर खास फिल्टर ऑप्शन दिए गए हैं। दिव्यांग अपनी डिसएबिलिटी और उसके क्योर होने जैसी सभी जानकारी ऐप में सेट कर सही पार्टनर तलाश कर सकते हैं।


दिव्यांगो की दोस्त और पार्टनर की ये खोज सिर्फ ऐप तक ही सीमित न रहे , इसलिए इंकलव रेग्यूलर मुलाकात भी करवाता है। सोशल स्पेसेस नाम के प्रोग्राम में सभी ऐप यूजर हिस्सा ले सकते हैं। इवेंट की टिकट बिक्री से ही कंपनी के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा आता है। पोएट्री, गायकी, गेम्स और खुशनुमा माहौल के बीच ऐप यूजर एक-दसरे से मिलते -जुलते हैं। इन पार्टीज में वील-चेयर रैम्प, स्पेशल वॉशरूम और साइन लैंग्वेज इनसट्रकटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।


ऐप और सोशल स्पेसेज जैसे इवेंट की से  10-15 लोग  ऐप यूजर शादी के बंधन में बंध चुके हैं। इसके साथ कई लोग को दोस्तों का साथ मिला है।


मैचमेकिंग को कस्टमाइज करने के लिए इंकलव प्रीमियम सर्विस इंकलव सिलेक्ट भी देता है। इस पर मैचमेकर यूजर के लिए उनकी पसंद और लाइफस्टाइल के हिसाब से पार्टनर ढूंढता है। इसके साथ ही यूजर को मीटिंग्स के लिए ग्रूम भी किया जाता है। फिलहाल ये सर्विस दिल्ली, मुंबई और कर्नाटका में ही मौजूद है। 6 लाख की क्राउड फंडिंग से शुरुआत के बाद इंकलव को क्विंटिलियन मीडिया से 1 करोड़ की फंडिंग मिली है। इस इनवेस्टमेंट का सबसे बड़ा हिस्सा ऐप डेवेलव करने और टीम को बढ़ाने में इस्तेमाल हुआ है। इस तरह के स्टार्टअप के लिए सबसे अहम है एक अच्छी टीम। एक टीम जो आपके मकसद को समझे और उसे आगे बढ़ाने में साथ दे।


इंकलव, आने वाले वक्त में दिव्यांगों के लिए एक बड़ी और खास कम्यूनिटी में बदलने का मकसद रखता है। अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी दूसरे देशों में भी कदम रखने का प्लान बना रही है। भारत में ढाई करोड़ से ज्यादा दिव्यांग हैं। खराब इंफ्रास्ट्रकचर और समाज की सोच के चलते उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इंकलव जैसे स्टार्टअप उन्हें अपना लाइफ पार्टनर और दोस्त चुनने का बराबरी का मौका दे रहे हैं। ऐसे स्टार्टअप बिजनेस के लिए एक उदाहरण और समाज के लिए एक मिसाल हैं।