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आंत्रप्रेन्योरः किसानों को स्टार बनाने वाला एग्रोस्टार

प्रकाशित Sat, 20, 2017 पर 13:59  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आवाज़ आंत्रप्रेन्योरः कैसे किसानों को हायटेक बना रहें स्टार्टअप
एक अच्छी फसल के लिए अब तक एक अच्छे मॉनसून की ही लोग राह देखते आए हैं, लेकिन सिर्फ बढ़िया बरसात ये गारंटी नही देती की किसान की फसल भी शानदार रहेंगी। इसमें बीझ, फर्टिलाइजर्स और दूसरे एग्रीकल्चर इनपूट की भी अहम भूमिका हैं। देश के किसानों को सबसे बहतरीन क्वालिटी की प्रोडक्ट उपल्बध कराने के मकसद से पुणे के सेठ ब्रदर्स ने शुरू किया है एग्रोस्ट्रार। अपने कारोबार के पांच सालों में कंपनी ने महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के 7 लाख किसानों के साथ काम किया हैं। क्या है इस बिजनेस की यूनिकनेस और कैसे एजुकेट हो रहा है देश का किसान आइए जानते हैं।


किसान दिन रात मेहनत कर अपने खेतों को सींचते हैं और हम तक अनाज और सबजिंया पहुंचाते हैं। लेकिन कई बार मौसम की मार, सही शिक्षा का आभाव, सामान की सही जानकारी न होने की वजह से ठगे जाते हैं। किसीनों की महनत के आड़े आ रहीं इन रुकावटों को दूर रने के खयाल ने जन्म दिया एक बिजनेस आयडिया को, पुणे के शार्दूल सेठ और इनके भाई  सितांशु सेठ देश के किसान को स्टार बनाने की सोची।
 
लेकिन किसानों को खेती करने के पारंपरिक तरीको के साथ साथ नए जमाने के ई कॉमर्स से जोड़ने के बीच सबसे बड़ी समस्या थी टेक्नोलॉजी का माध्यम चुनना। माध्यम ऐसा चाहिए था जो आसानी से उपलब्ध भी हो और यू़जर फ्रेंडली भी। ऐसे में फ्री मिस कॉल पर खेती से जुड़ी सलाह का कॉल सेंटर शुरू करने का आयडिया क्लिक हुआ और 2013 में सेठ भाईयों ने मिलकर एग्रोस्टार की शुरूआत की।


एग्रोस्टार ने नामी कृषि विश्वविद्यालय से कॉल सेंटर के लिए कृषि सलाहगारों की इकट्ठा किया। एक फोन कॉल पर किसानों को हर तरह की समस्या का समाधान मिलने लगा, किसान यहां सलाह के साथ साथ खेती के लिए आवश्यक सभी जरूरी प्रोडक्ट खरीद भी सकते है। इस कॉल सेंटर के जरीए कंपनी ने किसानों की छोटी- छोटी समस्याओं को नजदीकी से समझा। 


मिस कॉल पर सलाह के कॉन्सेप्ट को किसानों ने खूब पसंद किया, और एग्रोस्टार महाराष्ट्रा, गुजरात से राजस्थान तक पहुंच गया। अब इनके प्लेटफॉर्म पर 10 लाख से ज्यादा किसान हैं। इनमें से 3 लाख किसान नियमित रुप से सहाल लेने यहां पहुंचते हैं। इतना ही नही एग्रोस्टार अब किसानों के परिवार का हिस्सा बन चुका है।


कॉल सेंटर के बढिया रिस्पांस के बाद कंपनी ने एप भी लॉन्च किया है। इस एन्ड्रॉइड एप में खेती से जुड़े सारे अपडेट्स, खबरे, सलाह और प्रोडक्ट जानकारी सब कुछ है। 6 महिने पहले शुरू किए एप पर ढेड़ लाख किसान जुड़ चुके है, जिससे कंपनी 10 फीसदी रेवेन्यू कमा रही है।


किसानों को शुरू से अंत तक सर्विस देने के लिए कंपनी ने कॉल सेंटर, वेयर हाउस, फिल्ड टीम के मिक्स से एक ऐसा बिजनेस मॉडल खड़ा किया है जो भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए अहम है। इसे बनाने में कंपनी को 4 साल मेहनत करनी पड़ी। और नतिजा निवेशकों के भरोसे में झलक रहा है। अब तक कंपनी ने आईडीजी वेंचर्स, आविष्कर वेंचर्स और एक्सेल पार्टनर्स इन वेंचर फंड्स से कुल 100 करोड़ का निवेश जुटाया है। अब देश के टॉप 10 कृषि राज्यों में कारोबार को ले जाने की योजना कंपनी बना रही है।


आए दिन टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलाव को किसानों तक पहुंचाना कंपनी के सामने सबसे बड़ा चैलेज है। इस चैलेंज के साथ साथ फाउंडर्स इनोवेशन पर भी जोर दे रहे है। जिसके चलते एग्रोस्टार के एप में एडवांस इमेज रिकॉग्नाइज टेक्नॉलॉजी बिल्ट करने पर रिसर्च जारी है।


एग्रोस्टार देश के किसानों की असली दिक्कतों को आसान टेक्नोलॉजी की मदद से सुलझाने पर फोकस कर रही है और किसानों की आमदानी दोगुनी करने के इरादे का साथ आगे बढ़ रही है। एग्री टेक में वेदर मैनेजमेंट, मिट्टी का परीक्षण, ड्रिप सिंचाई जैसे कई काम और मौके हैं, देश के युवा अपने स्टार्टअप्स को इस रुख मोड़ेंगे तो उनकी ही नहीं किसानों की मेहनत भी रंग लाएगी।