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आवाज़ आंत्रप्रेन्योर: गोल्फ को स्मार्ट बनाने वाले गोल्फलैन की कहानी

प्रकाशित Sat, 14, 2018 पर 19:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आवाज़ आंत्र्यप्रेन्योर में आज बात शुरु करते हैं खेल से जुड़े एक व्यवसाय की। गोल्फ एक ऐसा खेल है जिसे अमीरों का शौक माना जाता है। इस रईस खेल के ठाट-बांट ही अलग है, फिर भी इसके शौकीनों की तादात कम नहीं है। ऐसे ही गोल्फ के शौकीन ध्रुव वर्मा ने विदेशों में अपने शौक को खूब पाला लेकिन जब भारत लौटे तो गोल्फ खेलने के लिए बड़ी मश्शकत करना पड़ी। यहां गोल्फ कोर्सेस तो कई सारे है लेकिन इसकी जानकारी आम नहीं थी और बुकिंग करने के लिए कई पापड़ बेलने पड़ते थे। तब ध्रुव ने गोल्फ में टेक्नोलॉजी के अभाव को महसूस किया। इस कमी को पूरा करने के साथ साथ इस खेल को स्मार्ट और पॉप्यूलर बनाने के मकसद से ध्रुव ने शुरु किया गोल्फलैन।


2011 में शुरु हुआ गोल्फलैन इंडिविजु्ल गोल्फर को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गोल्फ कोर्स बुकिंग में मदद करता था। इस प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहक  बिना कहीं भटके, अपनी सुविधा के मुताबिक पसंदीदा गोल्फ कोर्स बुक कर सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म  ने गोल्फ बुकिंग को तो आसान बनाया ही, साथ ही गोल्फिंग कम्यूनिटी को साथ लाने का मकसद भी पूरा हुआ।


गॉल्फलैन का बिजनेस मॉडेल 3 लेवेल पर काम करता है। पहला है बी2बी मॉडल जहां पर कॉरपोरेट अपने क्लायंट के लिए गॉल्फ बुकिंग कर सकते हैं, दूसरा है बी2सी जहां पर इंडिविजुअल गॉल्फर अपने लिए गॉल्फिंग की सुविधा ले सकते हैं और तीसरा है गॉल्फकोर्स के लिए मौजूद फ्लीट और इनवेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम।


कंपनी इन अलग अलग बिजनेस मॉडेल पर 4 कंपनियों के जरिए काम करती है। पहला है गॉल्फ ग्रीडी। ये ऑनलाइन बुकिंग प्लैटफॉर्म इंडिविजुअल गोल्फर को गोल्फ कोर्स बुक करने की सुविधा देता है। कंपनी इन ग्राहकों से हर गेम के लिए फीस या सब्सक्रिप्शन चार्ज करती है। कॉरपोरेट क्लायंट यानी बैंक्स और दूसरी बड़ी कंपनियां अक्सर अपने प्रिमियम ग्राहकों को गोल्फिंग जैसी सुविधाएं मुहय्या कराती है। गॉल्फलैन कॉरपोरेट के लिए ये काम अपने प्लेटफॉर्म टी-पास के जरिए करती है। ये भी सब्सक्रिप्शन पर आधारित बिजनेस मॉडल है।


गोल्फ सेंट्रा और स्टे प्राइम,  गोल्फ कोर्स को टेक्नोलॉजी से जोड़ने का काम करते हैं। गॉल्फ सेंट्रा गॉल्फ कोर्सेस के लिए कस्टमाइज्ड ऐप तैयार करता है। इनसे गॉल्फ कोर्सेज को डिजिटल प्लैटफॉर्म मिलता है,  जिससे कंपनी सीधे अपने ग्राहकों से जुड़ती हैं। स्टे प्राइम गोल्फ कोर्सेस का फ्लीट और मैनेजमेंट सिस्टम है। गॉल्फकार्ट में लगे इस सिस्टम से गोल्फर्स कोर्स का मैप, स्कोर और खाना ऑर्डर करने जैसी सुविधाओं का लुफ्त उठा सकते हैं। एक ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से शुरु हुए गोल्फलैन का सफर आज भले ही एक अच्छे मकाम पर पहुंच गया हो लेकिन इस राह में  मुश्किलें कम नही थी। जहां भारत में गोल्फ को डिजिटाइज करने के कॉन्सेप्ट को समझाने में वक्त लगा वहीं जब कंपनी ने विदेश में पैर पसारने चाहे तब भी कई सामने कई चैलेंजेस खड़े थे।


गोल्फलैन टेक्नोलॉजी पर आधारित कारोबार है, इसलिए ज्यादातर निवेश टेक्नोलॉजी डेवलप करने और बेहतर बनाने पर हुआ है। गोल्फलैन का सफर 6 करोड़ के शुरुआती निवेश से हुआ जिसे आगे बढ़ने में मदद मिली संस्थागत निवेशकों की। कंपनी को यॉरनेस्ट और आईएसओएन से 2.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली। इस निवेश का इस्तेमाल टेलेंट हायरिंग और टेक्नोलॉजी डेवलेपमेंट पर ही हो रहा है। गोल्फलैन आज भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी गोल्फकोर्स को डिजिटाइज करने का काम कर रहा है। इनमें मलेशिया, वियतनाम,सिंगापोर, दुबई समेत 45 से ज्यादा देश शामिल हैं।


इसके साथ साथ कंपनी एक्सिस बैंक, सिटी बैंक, एचएसबीसी, मास्टरकार्ड जैसे कई बड़े नाम अपने क्लायंट लिस्ट में जोड़ चुकी है। कंपनी का दावा है अब तक वो 1.5 लाख से ज्यादा बुकिंग और 55 हजार से ज्यादा गोल्फर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़ चुकी है। साल 2017 में 15 करोड़ रेवेन्यू कमाने वाली गोल्फलैन का मकसद है इस साल 40 करोड़ का कारोबार करे जिसे 2020 तक 100 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। कंपनी इस टार्गेट को पूरा करने के लिए अपने ब्रांड को मजबूत करने और पहुंच बढ़ाने पर जोर देगी।


फिलहाल भारत में गोल्फ पर ज्यादा कंपनियां खास ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में गोल्फलैन के लिए कारोबार बढ़ाने का अच्छा वक्त है। साथ ही ये भी साफ है कि इस स्पेस में नए लोगों के लिए कारोबार के ढेरों मौके भी बने हुए है।