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संकट में काली-पीली टैक्सियां

प्रकाशित Thu, 17, 2018 पर 17:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कैब एग्रिगेटर्स की बढ़ती संख्या ने ज्यादातर शहरों में ट्रैवल करने का तरीका बदल दिया है। इसकी सबसे ज्यादा मार पड़ी है मुंबई की काली-पीली टैक्सियों पर।


एक तरफ जहां टैक्सी ड्राइवर्स कैब एग्रीगेटर्स को बिजनेस घटने के लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। वहीं लोगों के पास इनसे शिकायतों की लंबी लिस्ट है।


काली-पीली टैक्सी वालों की मनमानी और नखरों से बचने के लिए लोगों ने ओला और उबर जैसे कैब एग्रीगेटर्स का रुख करना शुरू कर दिया और काली-पीली टैक्सियों का धंधा चौपट होने की यही सबसे बड़ी वजह है। आंकड़ों के मुताबिक 2014 से अब तक काली-पीली टैक्सियों की संख्या में 50 फीसदी तक कमी आ चुकी है ।


महाराष्ट्र सरकार ने पिछले साल मार्च में सिटी टैक्सी स्कीम लागू की थी। जिसके तहत रजिस्टर होने वाली सभी गाड़ियों के लिए किराया राज्य सरकार को ही तय करना था। लेकिन कैब एग्रीगेटर्स की याचिका के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया।