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आवाज़ अड्डा: बुलेट ट्रेन - महत्वाकांक्षा या देश की जरूरत!

प्रकाशित Fri, 15, 2017 पर 09:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हाल में जब भी रेल दुर्घटना हुई या रेलवे की कोई गड़बड़ी दिखाई दी तो लोगों ने कहा कि जिस सरकार से ट्रेनें नहीं संभल रहीं वो किस मुंह से बुलेट ट्रेन लाने की बात करती है। अब बुलेट ट्रेन का शिलान्यास हो गया, तब भी कुछ लोग ये कह रहे हैं कि रेलवे को संभालना छोड़कर सरकार बुलेट ट्रेन लाने में लगी है। इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि जापान भारत को लगभग मुफ्त में बुलेट ट्रेन की सौगात दे रहा है। इससे लोगों का सफर कम समय में पूरा होगा और पूरी तरह सुरक्षित भी रहेगा। इससे विकास होगा और रोजगार मिलेगा। आखिर कौन ठीक कह रहा है, सरकार या विपक्ष, या फिर दोनों की बात में थोड़ी-थोड़ी सच्चाई है। आवाज़ अड्डा में इसी पर बात होगी।


बुलेट ट्रेन का सपना अब भारत की जमीन पर उतरेगा, 2022 में मुंबई से अहमदाबाद की ट्रेन जर्नी 2 घंटे में होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसमें रफ्तार तो मिलेगी ही, रोजगार भी मिलेगा और जापान इसके लिए भारत को इतना सस्ता कर्ज दे रहा है कि बुलेट ट्रेन लगभग मुफ्त में मिलेगी।


लेकिन कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि प्रोजक्ट जापानी कंपनियों के हाथ में होगा जो मशीनों से काम लेने में विश्वास करती हैं। इसलिए रोजगार का ख्वाब ना ही देखें तो बेहतर। कांग्रेस कह रही है कि यूपीए सरकार के दौर में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए जापान के साथ जो बातचीत हुई थी, उसमें हाई स्पीड ट्रेन के अलावा दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, हावड़ा अमृतसर फ्रेट कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। लेकिन मोदी जी ने गुजरात चुनाव को देखते हुए अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन को फास्ट ट्रैक पर डाल दिया। वहीं सहयोगी शिवसेना भी आरोप लगा रही है कि प्रधानमंत्री निजी महत्वाकांक्षा को पूरा करने में लगे हैं, जबकि प्राथमिकता कुछ और होनी चाहिए।


सवाल उठाने वाले बढ़ते रेल हादसों की बात भी कर रहे हैं। यात्री सुरक्षा बढ़ाने से लेकर नेटवर्क को अपग्रेड और विस्तार करने के लिए रेलवे के काम की रफ्तार कम है। ऐसे में बुलेट ट्रेन पर भारी भरकम खर्च कितना जायज है? आम आदमी की नजर से देखें तो जिस पैसे में कई ट्रेनें दौड़ाई जा सकती थी उसके बजाए एक बुलेट ट्रेन दौड़ाना कितना जायज है!