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जीएसटी पर कारोबारी अब भी ख़फा

प्रकाशित Sat, 07, 2017 पर 14:18  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार ने जीएसटी पर मैन्युफैक्चर्स, एक्सपोर्टर्स, छोटे दुकानदारों सहित कई सेक्टर्स को राहत दी है मगर कारोबारी और विपक्ष अब भी इससे खुश नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार ने जीसटी लागू करने से पहले ट्रेनिंग के लिए समय का ठीक से इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने आगे कहा कि जीएसटी एक्सपेरिमेंट करने का मसला नहीं है। सरकार के फैसलों को जनता गंभीरता से लेती है। किसी सरकारी पॉलिसी को वापस लेना बहुत मुश्किल होता है। जीएसटी में व्यापारियों के लिए अभी भी दिक्कतें हैं। मलेशिया ने जीएसटी लागू करने से पहले सेक्टर्स को ट्रेनिंग दी। भारत में सरकार ने समय का ठीक से इस्तेमाल नहीं किया।


वहीं दिल्ली के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि जीएसटी काउंसिल को 28 फीसदी के टैक्स स्लैब को खत्म कर देना चाहिए। 28 फीसदी टैक्स दर में सबसे ज्यादा टैक्स चोरी होती है। 1.5 करोड़ रुपये तक के कारोबारी 3 महीने में रिटर्न फाइल करेंगे, 3 महीने में रिटर्न फाइल करना राहत की बात है। लेकिन सभी कारोबारियों को 3 महीने की मोहलत मिलनी चाहिए।


उधर जीएसटी से कारोबारी अब भी खफा हैं। फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स के प्रेसिडेंट विरेन शाह ने सरकार पर तीखा वार करते हुए कहा है कि वित्त मंत्री व्यापारियों की दिक्कतें समझने में पूरी तरह से फेल हुए हैं। उनका कहना है कि कारोबारियों के लिए इस बार काली दिवाली होगी। पिछले 10 साल में पहली बार दिवाली पर ग्राहक नहीं हैं। 18 फीसदी और 28 फीसदी की दरें बहुत ज्यादा हैं, इससे टैक्स चोरी बढ़ेगी और सरकार को कोई फायदा नहीं होगा।


इस बीच व्यापारियों का एक धड़े ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका दावा है कि जीएसटी पर सरकार की ओर से व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। कल जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद देश के कई जगहों पर व्यापारियों जश्न मनाया। व्यापारियों ने पटाखे और आतिशबाजी चलाकर अपनी खुशी का इजहार किया। इन लोगों ने एक दूसरे को मिठाइयां भी खिलाई। दरअसल सरकार के कदम से देश के करीब 90 फीसदी व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है।


आपको बता दें कि जीएसटी को लेकर सरकार ने एक बड़ा एलान और किया है। सरकार ने कहा है कि पेट्रोल-डीजल को भी नई टैक्स व्यवस्था में लाने पर विचार होगा। 9 नवंबर को जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा होगी।