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एफडीआई में रिफॉर्म को कैबिनेट की मंजूरी

प्रकाशित Wed, 10, 2018 पर 12:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सिंगल ब्रांड रिटेल में ऑटोमैटिक रूट से 100 फीसदी एफडीआई को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। साथ ही कंस्ट्रक्शन सेक्टर के एफडीआई नियमों में भी ढील देने का एलान किया गया है।


फिलहाल सिंगल ब्रांड रिटेल में सिर्फ 49 फीसदी तक एफडीआई को ऑटोमैटिक रूट से मंजूरी थी। एफडीआई वाले सिंगल ब्रांड रिटेल स्टोर के लिए घरेलू सामान खरीदने की शर्तों में ढील दी गई है। अब पहले साल से ही 30 फीसदी लोकल सोर्सिंग की जरूरत नहीं होगी। पहले 5 साल में अलग-अलग चरणों लोकल सोर्सिंग बढ़ानी होगी। 5 साल पूरा होने पर 30 फीसदी लोकल सोर्सिंग जरूरी होगी।


वहीं कैबिनेट ने एयर इंडिया में 49 फीसदी तक विदेशी निवेश लाने को मंजूरी दी है। एयर इंडिया में 49 फीसदी तक विदेशी निवेश को अप्रूवल रूट से मंजूरी दी गई है। एयर इंडिया में 49 फीसदी तक विदेशी निवेश के बावजूद मैनेजमेंट कंट्रोल भारतीय के हाथ में होना जरूरी होगा।


साथ ही रियल एस्टेट ब्रोकिंग सर्विस में 100 फीसदी विदेशी निवेश ऑटोमैटिक रूट से लाने को मंजूरी दी गई है। रियल एस्टेट ब्रोकिंग सर्विस को रियल एस्टेट कारोबार का हिस्सा नहीं माना जाएगा। इसके अलावा एफआईआई या एफपीआई को भी प्राइमरी मार्केट के जरिये पावर एक्सचेंज में 49 फीसदी तक निवेश की छूट दी गई है। ऑटोमैटिक रूट वाले सेक्टर में गैर नकदी सामान खरीदने के एवज में शेयर जारी करने की छूट दी गई है। मसलन मशीन इंपोर्ट के एवज में शेयर जारी करने की छूट ऑोटोमैटिक रूट से दी गई है।


वहीं भारतीय कंपनियों या एलएलपी में पूंजी लगाने के कारोबार से जुड़ी कंपनी को 100 फीसदी तक एफडीआई ऑोटोमैटिक रूट से लाने की छूट दी गई है। लेकिन, शर्त ये है कि कंपनी जिस कारोबार से जुड़ी है उसका फाइनेंशियल सेक्टर रेगुलेटर हो तभी 100 फीसदी तक एफडीआई ऑटोमेटिक रूट से लाने की छूट होगी। इसके अलावा मेडिकल डिवाइस में विदेशी निवेश की शर्तें आसान की गई हैं और मेडिकल डिवाइस की परिभाषा को बदला गया है।


वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने बताया कि रियल स्टेट में ब्रोकिंग सर्विस को बढ़ावा देने के लिए एफडीआई को मंजूरी दी गई है। साथ ही कोई विदेशी कंपनी अगर भारत में कारोबार करने आएगी। तो उसे भारतीय ऑडिटर रखना जरूरी होगा।