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कैंसर पेशेंट की गुहार पर कार्रवाई, टावर का रेडिएशन खतरनाक

प्रकाशित Wed, 12, 2017 पर 18:36  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ग्वालियर के 42 साल के एक कैंसर पेशेंट ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि उसके घर के पास मौजूद मोबाइल टावर को बंद किया जाए। क्योंकि इसी टावर के रेडिएशन की वजह से उसे कैंसर हुआ है। इस पर कोर्ट ने उस टावर को 7 दिनों के भीतर डिएक्टिवेट करने का आदेश दिया है। किसी एक व्यक्ति पर टावर हटवाने का ये पहला फैसला और पहली घटना होगी। गौरतलब है कि मोबाइल टावर के रेडिएशन को लेकर पक्ष-विपक्ष में चर्चा का एक लंबा दौर चलता आ रहा है। आज एक बार फिर हम इस मुद्दे पर बात करेंगे।


मोबाइल कंपनियां टावर के पक्ष में ये दलील देती हैं कि कॉल ड्रॉप से मुक्ति के लिए टावर जरूरी है और टावर के लिए रेडिएशन के अंतरराष्ट्रीय मापदंड लागू किए जाते हैं। मोबाइल टावर से इंसान और जानवर को खतरे का वैज्ञानिक आधार नहीं है। टावर से बहुत कम और सुरक्षित रेडिएशन होता है।


आइए जरा मोबाइल टावर लगाने के नियमों पर गौर फरमाते हैं। 5 मीटर से कम चौड़ाई वाली गली में टावर नहीं लगाया जा सकता है। रिहायशी मकान के सामने 20 मीटर तक एंटीना नहीं लगाया जा सकता है। मोबाइल टावर के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन रेंज कम होनी चाहिए। मोबाइल टावर की ऊंचाई 5 मंजिला बिल्डिंग जितनी होनी चाहिए। 2 एंटीना वाले टावर से घर की दूरी 35 मीटर जरूरी है, जबकि 12 एंटीना वाले टावर से घर की दूरी 75 मीटर जरूरी है।


हालांकि मोबाइल टावर के विरोधियों का तर्क है कि इससे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन निकलता है और रेडिएशन का ब्रेन सेल पर असर पड़ सकता है। रेडिएशन से कैंसर और ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा होता है। साथ ही रेडिएशन पक्षियों के लिए भी खतरनाक है।


पूरे देशभर में 12 लाख से ज्यादा मोबाइल टावर हैं और इनमें से 3.30 लाख टावरों की जांच की गई है। इस जांच में केवल 212 टावरों में तय सीमा से ज्यादा रेडिएशन मिला और टावरों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।