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महंगे क्रूड, बढ़ती ब्याज दरों ने उड़ाई नींद

प्रकाशित Fri, 18, 2018 पर 13:25  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बाजार के लिए बड़े संकेत अब डरावने लग रहे हैं, ऐसा लग रहा है कि बाजार और इकोनॉमी का सेटअप बिगड़ सकता है। इसमें दो विलेन हैं, महंगा कच्चा तेल और बढ़ती ब्याज दरें, ये दोनों स्पीड ब्रेकर का काम कर रहे हैं। कच्चा तेल जो अब 80 डॉलर पर पहुंच गया है यह भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता है। अकेले ये ही बाजार का मूड खराब कर सकता है। दूसरी ओर हमारी करेंसी यानी रुपया एशिया में सबसे कमजोर है। 2018 में अभी पांच महीने ही हुए हैं और डॉलर के सामने रुपया 6 फीसदी कमजोर हो चुका है। विदेशी निवेशकों को भी अब भारत का बाजार कम पसंद आ रहा है। इस खास पेशकश में यही समझेंगे कि इस नए सेटअप से पिक्चर कितनी खराब हो सकती है या फिर कोई बड़ी बात हमारी नजरों से छूट रही है।


कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है और बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच का अनुमान है कि क्रूड 100 डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं भारत में बॉन्ड यील्ड में 1-1.5 फीसदी की तेजी आ चुकी है, जबकि अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 3.12 फीसदी पर पहुंच गई है।


दरअसल ओपेक देशों की ओर से 2018 तक तेल का उत्पादन नहीं बढ़ाया जाएगा, ऐसे में क्रूड की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। साथ ही दुनियाभर में कच्चे तेल की मांग भी बढ़ी है। क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत पर भी असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल और डीजल का भाव बढ़ रहा है, ऐसे में महंगाई बढ़ेगी। भारत जरूरत का 70 फीसदी तेल इंपोर्ट करता है, ऐसे में इंपोर्ट खर्च काफी बढ़ रहा है। साथ ही भारत में ब्याज दर बढ़ने का खतरा है, जो शेयर बाजार के लिए बुरी खबर होगी। कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होगा और वित्तीय घाटा भी बढ़ेगा।