Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

सर्विस सेंटर कंपनियों की मनमानी, पहरेदार से की शिकायत

प्रकाशित Sat, 18, 2017 पर 16:40  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पर आने वाला टीवी का सबसे बड़ा कंज्यूमर शो पहरेदार ग्राहक की आवाज़ बुलंद करता है और लड़ता है ग्राहक के हक की लड़ाई। जब कंपनियों की मनमानी के सामने कंज्यूमर झुकने लगता है, तब उनके हक की आवाज़ लेकर पहरेदार करता है कंपनी से सवाल और कंपनी को देना होता है जवाब।


पहरेदार के जरिए उन लोगों को इंसाफ मिल पाता है जो कंपनियों के अड़ियल रवैये के चलते उन जरूरी सर्विसेज से महरूम रह जाते हैं जो उनका हक है। पहरेदार उन कंपनियों को भी सबक सिखाता है जो वादे तो कर देती हैं लेकिन उन्हें पूरे करने में आनाकानी करती हैं।


आज हम फोकस करेंगे कार कंपनियों की शिकायतों पर। फोर्ड की सर्विस सेंटर ने नई फोर्ड फिगो का किया बुरा हाल। सर्विसिंग के लिए गई कार का किया बुरा हाल और अब कंज्यूमर हो रहा है फोर्ड की बेरुखी का शिकार। जानते है हमारे एक्सपर्ट से कि कैसे करें ऑटो कंपनियों की मनमानी।


कंज्यूमर सुदीप्तो दास का कहना है कि 9 महीने पुरानी कार को फोर्ड के सर्विस सेंटर में सर्विसिंग के लिए भेजा था। 3 दिन बाद सर्विस सेंटर से कार के बारे में पता किया। सर्विस सेंटर ने कार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। खुद सर्विस सेंटर पहुंचे तो पता चला कि कार का एक्सीडेंट हो गया है और वह एक्सीडेंट सर्विस सेंटर के मेकैनिक से हुआ। सर्विस सेंटर का कहना है कि कार का टायर फटने से एक्सीडेंट हुआ हैं। कंज्यूमर ने पहरेदार को बताया कि सर्विस सेंटर ने इंश्योरेंस के जरिए कार ठीक करने को कहा। फोर्ड के सर्विस सेंटर से मदद नहीं मिली और फोर्ड ने मामले से पल्ला झाड़ा और गाड़ी के टायर पर दोष मढ़ दिया।


पहेरदार के पहुंचने पर फोर्ड कंपनी का कहना था कि कार की जांच के दौरान हादसा हुआ और मैकेनिक कार की रोड टेस्टिंग कर रहा था। कंपनी का कहना है कि एक्सीडेंट की वजह कार का टायर फटना है। जिम्मेदारी खुद ग्राहक की है, जिसकी जानकारी कंज्यूमर को दी। ग्राहक से इंश्योरेंस के जरिए कार ठीक करने का खर्च उठाने को कहा हैं। डीलर ने वादा किया है कि वो ग्राहक के इंश्योरेंस का नो क्लेम बोनस चुकाएगा। एक साल की एक्सटेंडेट वारंटी भी डीलर देगा।  ग्राहक की गाड़ी बलकर देने की मांग नहीं मानी जाएगी क्योंकि डीलर के तकनीशियन कार को दुरुस्त करने में समक्ष हैं। कंज्यूमर की मंजूरी मिलने के बाद कार ठीक कर दी जाएगी।


कंज्यूमर मामलों के जानकार वैभव गग्गर का कहना है कि एक तरफ फोर्ड अपनी इमेज सुधारने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ ग्राहक को अनसुना कर रही है। ग्राहक की कार बदलने की मांग को छुकराना सही नहीं है। गाड़ी को पहले जैसा करना नामुमकिन हैं। गाड़ी ठीक हुई भी तो आगे परेशानी आती रहेगी। फोर्ड को एक जिम्मेदार कंपनी की भूमिका मिभानी चाहिए। ग्राहक को कंज्यूमर कोर्ट की मदद लेनी चाहिए और फोर्ड ग्राहक को मुआवजा दे। क्योंकि फोर्ड के खुद के सर्विस सेंटर ने गाड़ी का हाल बेहाल किया हैं।