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कंज्यूमर अड्डा: वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील किसको कितना फायदा!

प्रकाशित Fri, 11, 2018 पर 08:04  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने भारत की लीडिंग ऑनलाइन रिटेल कंपनी फ्लिपकार्ट को खरीद लिया है। वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सा खरीदेगी। ऑनलाइन सेक्टर में ये भारत की सबसे बड़ी डील है जिसकी कीमत 16 अरब डॉलर है। ये डील साल के अंत तक पूरी होगी। फ्लिपकार्ट को लिस्ट कराने की भी तैयारी है। कंज्यूमर अड्डा में इसी डील पर हो रही है बड़ी चर्चा।


इस डील के फायदों की बात करें तो अब कंज्यूमर्स को सामान पर अच्छी डील्स मिल सकती हैं। अब कम कीमत पर ज्यादा वैरायटी की संभावना है। विदेश में वॉलमार्ट कम दाम पर सामान बेचती है। वॉलमार्ट की एंट्री से डिस्काउंट वॉर बढ़ सकता है। अब भारत में हर दिन कम दाम कॉन्सेप्ट संभव है। इस डील के बाद सामान की फास्ट डिलिवरी होगी। अब ग्रोसरी आइटम्स की भी फास्ट डिलिवरी हो सकेगी। कस्टमर केयर की सुविधा बेहतर होगी और ई-कॉमर्स में नई नौकरियों के मौके मिलेंगे।


किसानों की बात करें तो इससे कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ने की संभावना मानी जा रही है। कृषि सेक्टर में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। डिमांड बढ़ने से किसानों को फायदा पहुंचेगा और किसानों को बेहतर कीमत मिल पाएगी।


इस डील के बाद फ्लिपकार्ट के शेयर रखने वाले कर्मचारी मालामाल होंगे। बता दें कि करीब 3000 मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों के पास कंपनी के शेयर हैं। इन कर्मचारियों को 100 फीसदी शेयर बायबैक का ऑफर मिलेगा। ये बायबैक ऑफर 10000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर मिल सकता है। डील के बाद कर्मचारी शेयर फ्लिपकार्ट को बेच सकते हैं।


वहीं फ्लिपकार्ट के नजरिए से देखें तो फ्लिपकार्ट को वॉलमार्ट के ऑफलाइन स्टोर्स का फायदा मिलेगा। रिटेल कारोबार में वॉलमार्ट का लंबा अनुभव है। नई टेक्नोलॉजी का भी सपोर्ट मिलेगा। फ्लिपकार्ट को वॉलमार्ट की सप्लाई चेन का फायदा भी मिलेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर में नए निवेश से फायदा होगा और ग्लोबल मार्केट में पहुंच बढ़ेगी।


इस डील को वॉलमार्ट के नजरिए से देखें तो इससे वॉलमार्ट को भारत के ऑनलाइन बाजार में एंट्री मिलेगी और बड़ा भारतीय बाजार मिलेगा। ई-कॉमर्स बाजार में फ्लिपकार्ट की 39 फीसदी हिस्सेदारी है। भारत में वॉलमार्ट अमेजॉन को टक्कर देगी। ई-कॉमर्स बाजार में अमेजॉन की 30 फीसदी हिस्सेदारी है।चीन में भी दोनों कंपनियों के बीच सीधी टक्कर है। इस डील से वॉलमार्ट को भारतीय बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा।


उधर ऑफलाइन रिटेलर्स के आरोप हैं कि वॉलमार्ट रिटेल एफडीआई से देश में एंट्री नहीं कर पाई इसलिए मल्टी-ब्रांड रिटेल में ई-कॉमर्स के जरिए एंट्री कर रही है। डील से पहले 75 फीसदी ऑनलाइन विक्रेताओं की मंजूरी जरूरी है। वॉलमार्ट विदेश से सामान लाएगी और भारत को डंपिंग ग्राउंड बना देगी। भारतीय रिटेलर्स प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। ऑफलाइन रिटेलर्स का कारोबार चौपट हो जाएगा और करीब 3 करोड़ रिटेलर्स को डील से नुकसान होगा।