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कंज्यूमर अड्डा: खेलेगा इंडिया तो आगे बढ़ेगा इंडिया!

प्रकाशित Wed, 09, 2018 पर 09:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मास्टर ब्लास्टर सचिन ने सीबीएसई को सुझाव देते हुए कहा है कि बच्चे खेलें तो अच्छे। स्कूलों में रोजाना खेल का पीरियड अनिवार्य होना चाहिए। सभी क्लास में खेल का पीरियड अनिवार्य होना चाहिए। बच्चों के खेलकूद पर ध्यान दिया जाए। मोटापे के मामले में दुनिया में भारत तीसरे नंबर पर है। बच्चों में बढ़ता मोटापा गंभीर चिंता की बात है। अस्वस्थ युवा देश के लिए महामारी की तरह हैं। देश में मजबूत खेल संस्कृति से मदद मिलेगी।


वैसे हम सभी जानते हैं कि खेल बच्चों के विकास में काफी अहम भूमिका निभाता है लेकिन जब यही बात कोई सेलीब्रिटी कहता है तो हमारा ध्यान इस पर कुछ ज्यादा ही जाता है।


सीबीएसई के स्कूलों में स्वास्थ्य, व्यायाम शिक्षा अनिवार्य करने का फैसला लिया गया है। अब स्कूल रोजाना खेल का पीरियड भी रखेंगे। 9-12वीं तक के छात्रों के लिए ये अनिवार्य होगा। बच्चों को मैदान में जाकर खेलने की आजादी होगी। बच्चों को इसी आधार पर ग्रेड भी दिए जाएंगे। स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा का पीरियड अलग होगा। इसका मूल्यांकन और लागू कराना शिक्षकों की जिम्मेदारी होगा।


जानकारों की सलाह है कि स्कूली बच्चे नाश्ते में संतुलित आहार लें। उनके खाने में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन चाहिए। उनके लिए फैट और कार्बोहाइड्रेट भी जरूरी है। बच्चों को रोजाना 4-5 तरह की सब्जियां खानी चाहिए। इनको फल और ड्राई फ्रूट्स खाने चाहिए। बच्चों के खाने में हरी सब्जियां, अनाज दाल, दूध, दही पनीर, अंडा, मांस, मछली होना चाहिए।


खेलने के कई फायदे हैं। इससे बच्चा सोशल होना सीखता है। बच्चा टीमवर्क सीखता है, उनके दिमाग का विकास होता है। खेलों से शारीरिक विकास अच्छी तरह से होता है। इम्यूनिटी के लिए खेल फायदेमंद होते हैं। खेल भावना, धैर्य, शारीरिक सहनशीलता बढ़ती है।