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नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से उपभोक्ता असंतुष्ट

प्रकाशित Thu, 04, 2018 पर 10:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एक तरफ उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान दावे कर रहे हैं कि सरकार की नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से उपभोक्ताओं की शिकायतों का निपटारा हो रहा है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक हेल्पलाइन के इंटरनल सर्वे में पता चला है कि जिस तरह शिकायतों निपटारा हो रहा है उससे उपभोक्ता संतुष्ट नहीं है।


उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान के कुछ ट्वीट्स देखकर आपको लग रहा होगा कि सरकार की नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से उपभोक्ता काफी खुश हैं। लेकिन हकीकत कुछ और है। नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन ने नवंबर के आखिर में एक इंटरनल सर्वे किया।


इस सर्वे में जिन उपभोक्ताओं ने हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई उनसे फीडबैक मांगा गया। उपभोक्ताओं से पूछा गया, क्या वो हेल्पलाइन की तरफ से दिए गए समाधान से संतुष्ट हैं? इसमें करीब 51 फीसदी लोगों ने नहीं में जवाब दिया। जानकारों का कहना है कि सिर्फ हेल्पलाइन खोलने से फायदा नहीं है, उसे अधिकार भी मिलने चाहिए।


दरअसल उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने पिछले साल हेल्पलाइन में लोगों की संख्या 14 से बढ़ाकर 60 कर दी थी। इसके अलावा पिछले महीने नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन को रीजनल भाषाओं में भी लॉन्च किया गया। लेकिन हेल्पलाइन सिर्फ उपभोक्ता की शिकायत को उस कंपनी या संस्था तक पहुंचाने का काम करती है जिसके बारे में शिकायत है। अब ये कंपनी के ऊपर है कि वो उस शिकायत का समाधान करे या नहीं। जानकारों के मुताबिक शायद यही वजह है कि हेल्पलाइन खुद ही हेल्पलेस है।


सर्वे में ये भी पाया गया है कि 64 फीसदी लोगो ने अपनी लड़ाई बीच में ही छोड़ दी है हेल्पलाइन से शिकायतों का निबटारा ना मिलने की वजह से यानी एक बार फिर उपभोक्तता की हार हुई है सरकारी व्यवस्था होने के बावजूद।