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कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया गाइडलाइंस!

प्रकाशित Tue, 17, 2018 पर 16:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बाद अब कंपनियां भी सतर्क नजर आ रही हैं। खास तौर पर उनका ध्यान इस बात पर है कि उनके कर्मचारी फेसबुक और टि्वटर पर कुछ ऐसा तो नहीं बोल रहे हैं जिससे कंपनी की इमेज पर फर्क पड़ रहा हो। इसीलिए अब कंपनियां सोशल मीडिया को लेकर गाइडलाइंस तैयार कर रही हैं।


फेसबुक, टि्वटर और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ भी लिखते वक्त हम शायद ही ये सोचते हैं कि इसका असर क्या होगा। कई बार कुछ बातें सिर्फ मजाक के तौर पर लिख दी जाती हैं लेकिन जरूरी नहीं की वो सबको अच्छी लगे। अक्सर किसी फेसबुक पोस्ट को उसके लिखने वाले की राय या विचारधारा के तौर पर ही देखा जाता है। लेकिन अब ये बातें कॉरपोरेट सेक्टर को खटकने लगी है। क्योंकि कई बार कर्मचारियों की राय कंपनी की राय के तौर भी देख लिया जाता है और इससे कंपनी की इमेज पर असर पड़ता है। लेकिन अब कंपनियों ने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया गाइडलाइंस बनाना शुरू कर दिया है।


अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में सोशल मीडिया को लेकर पहले से ही कॉर्पोरेट गाइडलाइंस बनी हुई हैं। वहां पर कर्मचारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर बाकायदा नजर भी रखी जाती है। अब भारत में भी कंपनियों को ऐसी जरूरत महसूस हो रही है। हाल की कुछ राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सोशल मीडिया में काफी बयानबाजी हुई। ऐसे में कई सोशल मीडिया पोस्ट सीमाएं लांघ गईं हो तो ताजुब्ब नहीं है। लोगों का भी मानना है कि सोशल मीडिया पर क्या कहा जा रहा है इसके लिए कुछ तो नियम कायदे जरूर होने चाहिए।


सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग अक्सर विवादों और असंवेदनाओं को जन्म देता है। ऐसे में इस आज़ादी की कीमत कंपनी की ब्रांड इमेज को न चुकानी पड़े इसके लिए कॉर्पोरेट अब सोशल मीडिया के दायरे तय करने पर विचार कर रहे हैं।