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हेल्थ, रक्षा क्षेत्र में डाटा सिक्योरिटी पर खतरा

प्रकाशित Sat, 14, 2018 पर 13:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दुनियाभर में डाटा पर खतरे के बावजूद भारत में सरकारी संगठन और हेल्थकेयर सेंटर्स साइबर सुरक्षा को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जानकारों के मुताबिक स्वास्थ्य सेवाएं और रक्षा क्षेत्र में साइबर हमले की सबसे ज्यादा गुंजाइश है। इसलिए यहां डाटा सिक्योरिटी पर ध्यान देने की जरूरत है।


डाटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन आने वाले दिनों में बड़ी मुसीबत की तरफ इशारा कर रहे हैं। डाटा सिक्योरिटी को लेकर दुनियाभर में हंगामा मचा हुआ है लेकिन भारत में अभी भी इस पर खास जोर नहीं दिया जा रहा। जानकारों का कहना है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं और रक्षा क्षेत्र में डाटा सिक्योरिटी पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। हेल्थकेयर सेंटर्स या हॉस्पिटल्स का डाटा लीक हुआ तो आपका फोन नंबर, आधार नंबर, पैन नंबर या मरीज की सेहत से जुड़ी अहम व्यक्तिगत जानकारियां हैकर्स के पास जा सकती हैं। वहीं रक्षा क्षेत्र में देश की सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारियां होती हैं। इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम की मानें तो अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 के बीच 22 हजार से ज्यादा वेबसाइट हैक हुईं जिनमें से 114 वेबसाइट सरकारी थीं। इसलिए इन संस्थानों में डाटा सिक्योरिटी मजबूत करने की जरूरत है।


जानकारों का कहना है कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बहुत बड़ी टेक्नोलॉजी की जरूरत नहीं है। कुछ बुनियादी चीजों पर ध्यान देकर भी हैकिंग से बचा जा सकता है। जानकारों का कहना है कि आज की तारीख में हैकिंग काफी हो गई है और किसी भी कंपनी का सर्वर हैक करके डाटा चोरी करना आसान हो गया है। हैकर का मकसद ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना होता है और अगर किसी भी सरकारी संस्थान और हॉस्पिटल्स का डाटा चोरी होता है तो इससे काफी बड़ा नुकसान होने की संभावना है।