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आवाज़ आंत्रप्रेन्योरः दिल की बीमारी, जांच करना आसान

प्रकाशित Sat, 17, 2017 पर 13:25  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

भारत में हर 33 सेकेंड में एक शक्स हार्ट अटैक से अपनी जान गंवा देते हैं। देश के 6 करोड़ दिल के मरीजों के लिए सिर्फ 7000 कार्डिओलॉजिस्ट हैं। ये आंकडे चौकाने वाले हैं और बस यहीं कहते हैं की भारत के दिल को स्वस्थ रखने की जरूरत हैं। देश की 134 करोड की आबादी को समय पर कार्डिओ केयर देने के लिए कुछ अलग करना होगा। इसी कोशिश में लगा हैं बंगालुरू का स्टार्टअप कार्डिओट्रेक। जो दिल की बिमारी की जांच समय पर करता है और महंगे इलाज से ग्रामीण इलाके के मरिजों को दूर रख रहा है, इस मेड इन इंडिया डिवाइस का डंका सिर्फ देश ही नही विदेश में भी जोर से बज रहा है।


ग्रामीण इलाकों में दिल की बिमारियों की जांच और उनका इलाज आज भी हेल्थकेयर सेक्टर के लिए बड़ा चैलेंज है। मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के अधुरे विकास के चलते कई हिस्सों में कार्डिक डाग्नोस्ट्रिक्स की बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं है। इसी दिक्कत को समझते हुए उबर डाग्नोस्ट्रिक्स के आशिम रॉय और अविन अग्रवाल ने आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी पर आधारित कार्डिओट्रेक बनाया है।  


दिल की बिमारियों की जांच कराने में लगने वाला खर्च, ग्रामीण इलाकों में जांच केंद्रों की कमि, मरीजों को इलाज के प्रति ढिलापन इन सभी दिक्कतों को हल करने के उद्देश्य से कार्डिओट्रेक को बनाया गया । और ऐसा डिवाइस बना जो इस्तेमाल में आसान है और मरिजों के लिए किफायति दाम में उपलब्ध भी है।


देश के हर ग्रामीण इलाके में मरिजों को इसका फायदा मिले, इसलिए कंपनी डिवाइस को सबस्क्रिप्शन मॉडल पर डॉक्टर्स, अस्पताल और हेल्थ सेंटर्स, को मुहय्या करा रही है। 2000 प्रति माह की दर से  कार्डिओट्रेक का सबस्क्रीप्शन शुरू होता है। दोनों फाउंजर्स ने मिलकर अपनी बचत से कंपनी की शुरूआत की और 3 करोड़ के फंड्स जुटाए है। महज दो साल में कंपनी का दायरा अंतराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ गया।


अब कार्डिओट्रेक  को इस्तेमाल में आसान और ऑटोमेटेड करते हुए,  इकठ्ठा होने वाले डेटा के आधार पर दिल की बिमारी को ट्रेस करना आसान करने  पर फाउंडर्स जोर दे रहे है। 6 करोड़ मरिजों के लिए 7000 कार्डिओलॉजिस्ट की बड़ी गैप को भरने के लिए कार्डिओट्रेक  जैसे मेडिकल डिवाइसेस काफी मददगार साबित हो रहे है।