महंगा होता इलाज, डॉक्टर कब लिखेंगे जेनरिक दवायें! -
Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

महंगा होता इलाज, डॉक्टर कब लिखेंगे जेनरिक दवायें!

प्रकाशित Tue, 18, 2017 पर 18:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बीमार होने किसी के लिए भी अच्छा नहीं है लेकिन आर्थिक तौर पर कमजोर के लिए बिमार पड़ना किसी सजा से कम नहीं है। महंगे इलाज के बीच महंगी दवाइयां मरीज की कमर तोड़ देती है। इसीलिए सरकार अब जेनरिक दवाओं पर जोर दे रही है और उसके लिए बाकायदा कानून बनाने की बात कर रही है। आज सीएनबीसी-आवाज़ भी इस पर चर्चा कर रहा है कि आखिर क्यों जेनरिक दवाओं के होते हुए भी महंगी-महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखी जाती हैं, आखिर क्यों जेनरिक दवाएं आसानी से नहीं मिलती और जेनरिक दवाओं के बारें में लोग की जानकारी इतनी कम क्यों है।


कल सूरत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि जेनरिक दवाईयों के लिए सरकार जल्द ही कानून बनाने जा रही है। जिसके बाद डॉक्टरों के लिए जेनरिक दवाईयां लिखना अनिवार्य होगा। मगर जेनरिक दवाएं आज भी लिखी जा रही हैं और सरकार ने खास जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र के नाम से दुकाने भीं खुलवाई हैं और आगे 3,000 से ज्यादा जन औषधि स्टोर खुलेंगे।


आइए जान लेते हैं कि जेनरिक दवाईयां क्या होती हैं। गौरतलब है कि हर दवा का एक केमिकल फॉर्मूला होता है। केमिकल फॉर्मूले को सॉल्ट कहा जाता है। सॉल्ट का एक जेनरिक नाम रखा जाता है। जेनरिक नाम पूरी दुनिया में एक रहता है। जबकि सॉल्ट को ब्रांड के तहत भी बेचा जाता है। ब्रांडेड दवाएं, जेनरिक के मुकाबले महंगी होती हैं।


जेनरिक दवाओं के फायदे की बात करें तो जेनरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से सस्ती होती हैं। दवाओं की पब्लिसिटी पर खर्चा नहीं होता। सरकार खुद कीमत तय करती है। जेनरिक दवाओं का असर ब्रांडेड जैसा ही होता है। जेनरिक दवा बड़े शहरों में जेनरिक मेडिकल स्टोरों पर मिलती हैं। सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों में भी जेनरिक दवा मिलती है।


1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की घोषणा की गई। 700 से ज्यादा दवाइयों के दाम तय किए गए हैं। जेनेरिक दवाओं के लिए जन औषधि स्टोर खोले गए हैं। वहीं शासकीय अस्पतालों में भी जन औषधि स्टोर खोले गए हैं जिनमें गरीबों के लिए सस्ती दवाइयों की व्यवस्था है।