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1 जुलाई से एक देश एक टैक्स, कितना बदलेगी जिंदगी

प्रकाशित Tue, 13, 2017 पर 18:18  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जुलाई से एक देश-एक टैक्स हकीकत बन जाएगा। तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। पिछली बैठक में जीएसटी काउंसिल ने 66 आइटम पर रेट में कटौती की। ज्यातर आइटम पर सुधार करते हुए टैक्स रेट एक स्लैब नीचे खिसका दिए गए हैं। लेकिन कुछ आइटम, जैसे कि नमक पर टैक्स पूरी तरह हटा दिया गया। कंपोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दी गई। ये एक तरह से एक संकेत भी है कि जीएसटी जैसे विशाल रिफॉर्म की राह में खुले दिमाग से चलने की जरूरत है। लेकिन अब सरकार आगे क्या और कैसे करने जा रही है इसपर चर्चा करेंगे।


18 जून को जीएसटी काउंसिल की 17वीं बैठक होगी जिसमें ईवे बिल 1 जुलाई से लागू होगा या नहीं, जीएसटी में लॉटरी पर टैक्स की दर क्या हो, एंटी प्रोफिटियरिंग कानून क्या हों जैसे मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। हालांकि हाइब्रिड वाहनों की सुनवाई पर सस्पेंस बना हुआ है।


ईवे बिल के मसले की बात करें तो 50,000 रुपये से ज्यादा के समान ढुलाई पर ईवे बिल की प्रावधान है, इसके लिए समान ढुलाई से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। ईवे बिल लागू करने के लिए तैयारियों पर संदेह है। केंद्र ईवे लागू करने का मामला टालना चाहता है। कुछ राज्य 1 जुलाई से ईवे बिल चाहते हैं। राज्यों को राजस्व के नुकसान का अंदेशा है।


लॉटरी पर जीएसटी की बात करें तो अभी कुछ राज्यों में सरकार लॉटरी चलाती है। राज्य सरकारें लॉटरी पर नाममात्र टैक्स लगाती हैं। केंद्र लॉटरी पर 28 फीसदी जीएसटी लगाने के पक्ष में। लॉटरी पॉट के 3 हिस्से होते हैं प्राइज, टैक्स, मुनाफा। केंद्र फेस वैल्यू पर जीएसटी लगाने के पक्ष में है। फेस वैल्यूयानि प्राइज+टैक्स+मुनाफा।


एंटी प्रोफिटियरिंग कानून की बात करें तो इसके तहत टैक्स घटने का फायदा ग्राहक को देना जरूरी। इसके अलावा इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा भी ग्राहक को देना होगा। इसके लिए कीमतों में कमी करके ग्राहक को लाभ देना होगा। एंटी प्रोफिटियरिंग कानून के तहत गलत मुनाफाखोरी करने पर कार्रवाई का प्रावधान भी है। अभी एंटी प्रोफिटियरिंग के नियम तय होना बाकी हैं। बिना सख्त कानून मुनाफाखोरी रोकना मुश्किल है।