Moneycontrol » समाचार » बाज़ार खबरें

आवाज़ अड्डा: गौरी की हत्या, समाज की मानसिकता पर सवाल!

प्रकाशित Thu, 07, 2017 पर 09:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ये सच है कि अभी किसी को नहीं पता कि पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या किसने की। लेकिन ये भी सच है कि गौरी लंकेश बेखौफ सच को सामने रखने वाली पत्रकार थीं, वो वामपंथी विचारधारा के समर्थन में या हिंदुत्ववादी सोच के खिलाफ खड़ी साफ नजर आती थीं। पहली नजर में ये हत्या, विरोध की आवाज दबाने का प्रयास दिखती है। जिस पेशेवर तरीके से उन्हें मारा गया है, वो ठंडे दिमाग से सोच-समझकर की गई या करवाई गई हत्या है। मरने वालों के कामकाज, हत्या के पीछे विरोध की आवाज को दबाने की नीयत और हत्या के तरीके को ध्यान में रखें तो गौरी लंकेश की हत्या, नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पनसारे और एम एम कलबुर्गी की हत्याओं के सिलसिले की एक और कड़ी लगती है। ऐसे में गौरी लंकेश जिन संस्थाओं, विचारधाराओं और व्यक्तियों के विरोध में लिखती रहीं, उनपर अंगुली उठना स्वाभाविक है। लेकिन आवाज अड्डा में हम कोई नतीजा निकाल कर बहस करने नहीं बैठे हैं, बल्कि खुले दिमाग से इसपर बात करना चाहते हैं कि लोकतंत्र में एक पत्रकार की हत्या पूरे समाज का बड़ा नुकसान है, फिर चाहे उसकी लेखनी जिसके भी पक्ष या विपक्ष में जाती हो। लेकिन उससे पहले देख लेते हैं कि गौरी की हत्या पर समाज और राजनीति का क्या नजरिया है।


कर्नाटक की फायर ब्रांड जर्नलिस्ट गौरी लंकेश की हत्या पर पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। बंगलुरू, मुंबई, दिल्ली समेत देश भर में पत्रकारों ने धरना, प्रदर्शन किया। लंकेश की हत्या को विरोध की आवाज दबाने की साजिश बताया जा रहा है। इस लिहाज से इस घटना को रैशनलिस्ट नरेंद्र दाभोलकर, वामपंथी लेखक गोविंद पनसारे और कन्नड़ लेखक एम एम कलबुर्गी की हत्या की अगली कड़ी भी बताया जा रहा है। वामपंथी विचारधारा का समर्थन करने वाली गौरी सरकार या कॉरपोरेट से विज्ञापन लिए बिना अपनी पत्रिका, गौरी लंकेश पत्रिका प्रकाशित करती थीं। वो हिंदुत्व और दक्षिणपंथियों के खिलाफ खुलकर लिखती रही थीं। गौरी लंकेश प्रधानमंत्री मोदी भी की खुलकर आलोचना करती थीं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने हत्या की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है, लेकिन कहा है कि इस वक्त हत्या के कारणों पर कोई निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।


हाल में एक वेवसाइट को दिए गए इंटरव्यू में गौरी लंकेश ने कहा था कि मोदी भक्त और हिंदुत्व ब्रिगेड उन्हें जेल में देखना चाहते थे। उनकी हत्या की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर बीजेपी, आरएसएस और दक्षिणपंथी विचारधारा को जोड़ते हुए तल्ख टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। तो कुछ लोगों ने इसके जवाब में लंकेश की हत्या को जस्टिफाई भी करते हुए पोस्ट भी डाले। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी हत्या का संबंध केंद्र की बीजेपी सरकार और आरएसएस की मानसिकता से जोड़ा है।


जवाब में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि गौरी लंकेश की हत्या कर्नाटक में हुई है, वहां कांग्रेस की सरकार है, इसलिए जिम्मेदारी कांग्रेस की है, ना कि बीजेपी की। सवाल उठता है कि क्या गौरी लंकेश की हत्या विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश है? सवाल ये भी है कि क्या हम एक ऐसा समाज बन चुके हैं कि किसी भी बात पर बिना सोचे-समझे सोशल मीडिया पर तीखी बहस में जुट जाते हैं? आखिर किस मानसिकता के तहत कुछ लोग हत्या को भी जस्टिफाई करने लगते हैं!