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बढ़ रही है अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट की तादाद, रुकेगी मनमानी!

प्रकाशित Mon, 13, 2017 पर 18:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

घर खरीदारों की ताकत बढ़ाने के लिए देश में रेरा लागू हो चुका है, उम्मीद थी कि रेरा के आने से घर खरीदारों की ताकत में इजाफा होगा। खास तौर पर ऐसे लोगों के लिए नई उम्मीद जागेगी जिन्होने अपनू खून पसीने की कमाई किसी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में लगाई लेकिन वो अटक कर रह गया। अब एक सर्वे कह रहा है कि आज भी देश के 62 पर प्रोजेक्ट देरी से चल रहे हैं। इसमें से 30 फीसदी ऐसे में जिनमें 2 साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है।


लाइसिस फोरास सर्वे के मुताबिक 50 शहरों में देरी से कई हाउसिंग प्रोजेक्ट चल रहे है। जिसमें से करीब 62 फीसदी हाउसिंग प्रोजेक्ट में देरी से चल रहे है। 64 फीसदी फ्लैट/अपार्टमेंट्स में देरी और 30 फीसदी अपार्टमेंट्स में 2 साल से ज्यादा की देरी हो चुकी है।


अटके घरों पर सरकार ने एक्शन लिया है। केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को जानकारी दी है। अकेले महाराष्ट्र में 5.3 लाख फ्लैट्स अटके है। इनमें से 20 फीसदी फ्लैट्स में 3 साल से ज्यादा की देरी से अटैक पड़े है। बिल्डर्स ने बॉम्बे हाईकोर्ट में रेरा को चुनौती दी है। बॉम्बे हाईकोर्ट में मामलों की सुनवाई चल रही है। दरअसल, बिल्डर्स इन अधूरे प्रोजेक्ट को रेरा से बाहर चाहते हैं।


अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए डिलिवरी की तारीख में हेराफेरी कर रहे है। खरीदारों को अलग तारीख और रेरा में अलग तारीख बता रहे है।  इतना ही नहीं ग्राहकों और रेरा में दिए बिल्डिंग प्लान में अंतर है। प्रोजेक्ट की सुविधाओं की जानकारी में अंतर है। कार्पेट में दीवार की मोटाई भी शामिल है। ग्राहक अंतर की शिकायत कर रहे हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें डिलिवरी तारीख को लेकर की जा रही है। घर के प्लान में बदलाव की शिकायतें भी की जा रही है। खराब कंस्ट्रक्शन की भी शिकायतें आई है।



रेरा के नियमों पर ध्यान दिया जाए तो सभी प्रोजेक्ट का रेरा में रजिस्ट्रेशन जरूरी है। बिल्डर को रेरा के तहत प्रोजेक्ट की सही जानकारी देनी होगी। साथ ही अपनी वेबसाइट पर प्रोजेक्ट की जानकारी देनी होगी। 60 फीसदी प्रोजेक्ट बुकिंग पर  हाउसिंग सोसायटी बनेगी। बिल्डर को तीन महीने के अंदर सोसायटी को प्रॉपर्टी देनी होगी। खरीदारों के पूरी रकम देने के बाद ट्रांसफर किया जायेगा। तीसरी बार ईएमआई डिफॉल्ट होने पर ही एग्रीमेंट रद्द किया जायेगा।


सेल एग्रीमेंट में दी गई तारीख अंतिम मानी जाएगी। इस तारीख के मुताबिक बिल्डर को पजेशन देना होगा। प्रोजेक्ट में देरी पर बिल्डर्स को  पेनल्टी देनी होगी।