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आवाज़ अड्डा: ग्रोथ की होगी फिक्र या महंगाई रहेगी हावी!

प्रकाशित Wed, 04, 2017 पर 09:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2-2 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटा दी है। एक साथ तमाम तरह के इंधन पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, सीएनजी, पीएनजी सब कुछ महंगे होने के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है। नोटबंदी, जीएसटी और जीडीपी ग्रोथ में गिरावट के बाद सरकार पर भारी दवाब है। ऐसे में उम्मीद जा रही है कि इकोनॉमी ने नई जान फूंकने के लिए सरकार पैकेज का ऐलान भी करे। लेकिन सरकार पैकेज का ऐलान करने के बजाय आरबीआई से उम्मीद कर रही है कि वो दरें घटाए ताकि सस्ते कर्ज के रूप में इकोनॉमी को बूस्ट मिल सके। लेकिन एक्सपर्ट्स की राय है कि महंगाई के टार्गेट को देखते हुए आरबीआई के पास दरों में कटौती की गुंजाइश नहीं बनती। अब सवाल है कि पेट्रोल, डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की राहत में क्या सरकार ने कोई मैसेज देने की कोशिश की है। जाहिर है कल की क्रेडिट पॉलिसी पर सबकी नजरें टिक गई हैं।


मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की हर बैठक से पहले सवाल तो यही होता है कि रेट घटेंगे या नहीं, लेकिन इस बार इस सवाल से बड़ी ये पहेली है कि RBI ग्रोथ की जरूरत को देखेगा या वित्तीय अनुशासन के पक्ष में फैसला करेगा। इस साल का वित्तीय घाटे का टार्गेट 3.2 फीसदी है जिसका 92 फीसदी तक खर्च हो चुका है। यानि बाकी के महीनों में टार्गेट से ज्यादा वित्तीय घाटे की पूरी गुंजाइश है। रुपया मजबूती हासिल करने के बाद फिर से फिसल चुका है। 5.7 फीसदी तक गिर चुकी ग्रोथ को संभालने के लिए सस्ते कर्ज को बड़ा हथियार माना जा रहा है, लेकिन आरबीआई के सामने सवाल ये है कि क्या 4 फीसदी के टार्गेट से नीचे चल रही महंगाई दर को और बढ़ने की छूट दी सकती है।


याद रहे कि अगस्त की पॉलिसी में रेपो रेट को 0.25 फीसदी कम कर 6 फीसदी पर लाया गया था तो खुदरा महंगाई दर उसी महीने 1 फीसदी बढ़कर 3.36 फीसदी हो गई थी। जानकारों की राय है कि महंगाई दर नवंबर तक वैसे भी 4 फीसदी के टार्गेट को पार कर सकती है। इधर डीजल के दाम अब तक के सबसे ऊपरी स्तर पर हैं, पेट्रोल, रसोई गैस, सीएनजी, विमान का ईंधन के दाम भी बढ़ चुके हैं। यानि महंगाई के मोर्चे पर पेट्रोलियम ईंधन की कीमतें सबसे बड़ा विलन साबित हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पेट्रोल,डीजल, गैस की कीमतों को खुली छूट देकर क्या सरकार ने रेट कट के लिए बना-बनाया माहौल बिगाड़ दिया? क्या अब आरबीआई के पास रेट कट की बिल्कुल गुंजाइश नहीं बची? आवाज़ अड्डा में यहां इन्ही सवालों के जवाब खोजने की कोशिस की जा रही है।