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जीएसटीः मुनाफाखोरी पर वार, इंडस्ट्री को इनकार!

प्रकाशित Mon, 08, 2018 पर 18:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पिछले कुछ दिनों से जीएसटी के नाम पर मुनाफाखोरी की ढ़ेर सारी शिकायतें आ रही है। जिसे लेकर सरकार ने एक कानून बनाया और इस कानून के तहत सरकार उन मुनाफाखोरों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि, सरकार की यह कार्रवाई वाकई कारगार साबित हो पाएगी? या फिर से इंस्पेक्टर राज फैलेगा। आज यह सवाल इसलिए भी ज्यादा अहम हो चुका है क्योंकि कई सारी इंडस्ट्रीज ने एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी कानून पर सवाल उठाना शुरु कर दिया है।


मुनाफाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नेशनल एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी ने 5 कंपनियों को नोटिस भेजा है। जिसमें हार्डकासल रेस्टोरेंट, पश्चिम, दक्षिण भारत में मैक्डॉनल्ड्स की फ्रेंचाइजी, रिटेलर लाइफस्टाइल इंटरनेशनल, जयपुर की ट्रेडिंग फर्म, होंडा कार्स के डीलर और रियल एस्टेट कंपनी पिरामिड इंफ्राटेक का नाम शामिल है।


बता दें कि इन कंपनियों पर जीएसटी का फायदा ग्राहकों को नहीं देने का आरोप लगाया गया है। लेकिन इंडस्ट्री संगठन सीआईआई ने सरकार से एंटी-प्रॉफिटियरिंग नियम स्‍पष्‍ट करने की मांग की है। साथ ही इंडस्ट्री का मानना है कि सरकार उन्हें इनपुट टैक्‍स क्रेडिट का फायदा दें। जानकारों के अनुसार सरकार को सामान या सर्विस के दाम घटाने चाहिए क्योंकि सामाना या सर्विस की कीमत तय करने में कई फैक्टर काम करते हैं। वहीं इंडस्ट्रीज ने सप्लाई-डिमांड, सप्लायर की लागत, टैक्स को शामिल करने की मांग की है।


दरअसल, इंडस्ट्रीज का मानना है कि जीएसटी नियमों से छोटे कारोबारियों की मुसीबत बढ़ेगी। शुरुआत में टैक्‍स अधिकारी संवेदनशील रहें क्योंकि शुरुआती दौर में ज्‍यादा कठोरता उचित नहीं है। 


मुनाफाखोरी रोकने के लिए सरकार ने एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी का गठन किया था। इसके तहत कंपनियों को जीएसटी में कमी का फायदा देना जरूरी है। पहले डायरेक्टर जनरल सेफगार्ड के पास शिकायत करना होगा। उसके बाद राज्य की स्क्रीनिंग कमिटी के पास शिकायत जाएगी। इतना ही नहीं केंद्र की स्टैंडिंग कमिटी के पास भी शिकायत दर्ज की जाएगी। डीजी सेफगार्ड को 3 महीने में रिपोर्ट देनी होगी। किसी कारण  3 महीने में रिपोर्ट नहीं सौपीं जाती है तो 3 महीने का एक्सटेंशन और मिल सकता है।


एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार दे सकती है। जिसके बाद कंपनियों को मुनाफा 18 फीसदी ब्याज के साथ ग्राहकों को लौटाना होगा। इतना ही नहीं अथॉरिटी कीमतें घटाने के निर्देश भी दे सकती है। एंटी-प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी कानून के तहत कंपनियों को ग्राहक की पहचान करनी होगी। पहचान नहीं होने पर कंज्यूमर वेलफेयर फंड में रकम जाएगी। अथॉरिटी के पास कंपनियों पर जुर्माना लगाने का अधिकार होगा। इस कानून के तहत दोषी कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने का अधिकार भी अथॉरिटी के पास होगा।