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पूरे रियल एस्टेट पर जीएसटी, मिलेंगे सस्ते घर!

प्रकाशित Fri, 13, 2017 पर 19:41  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्त मंत्री ने संकेत दिए हैं कि पूरे रियल एस्टेट पर जीएसटी लगाया जा सकता है। इसके मायने क्या हैं! आप सोच रहे होंगे कि रियल एस्टेट पर तो जीएसटी है, घर खरीद पर 12 फीसदी जीएसटी लग चुका है। नहीं ये पूरी तरह से सही नहीं है। पूरे रियल एस्टेट सेक्टर को जीएसटी के दायरे में लाने के मायने ये हैं कि रियल एस्टेट में जिसमें जमीन भी शामिल है या किसी तरह की अचल संपत्ति शामिल है सब पर जीएसटी लगाने की बात है। आप घर खरीदते समय जो तमाम तरीके के टैक्स भरते हैं उनको हटा कर बस एक जीएसटी करने की बात है। इससे होगा क्या, क्या आपके लिए इससे घर खरीद सस्ता होगा, इसी पर आधारित है आज की कंज्यूमर अड्डा की चर्चा।


जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में पूरे रियल एस्टेट सेक्टर को जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा होगी। 9 नवंबर को गुवाहाटी में जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक। कुछ राज्य पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में जीएसटी लगाने के पक्ष में हैं। इस बैठक में इस मुद्दे पर सहमति बन सकती है।


जानकारों का कहना है कि ऐसा होने पर टैक्स की चोरी रुकेगी, कालेधन का इस्तेमाल रुकेगा, टैक्स का दायरा बढ़ेगा और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आएगी। खरीदारों को घर खरीदने पर एक ही टैक्स देना होगा। जीएसटी की दर काफी कम हो सकती। कम जीएसटी की वजह से घर सस्ता होगा।


ऐसा होने पर बिल्डर्स को भी फायदा होगा। बिल्डर्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा। स्टील, सीमेंट, पेंट, अन्य सामानों पर टैक्स क्रेडिट मिलेगा। सेनिटरी, इलेक्ट्रिकल फिटिंग पर भी टैक्स क्रेडिट मिलेगा। मकान सस्ते होंगे तो बिक्री बढ़ेगी और बिल्डर्स की इनवेंट्री कम होगी।


फिलहाल अभी नियम ये हैं कि रियल एस्टेट पर पूरी तरह से जीएसटी में नहीं है। निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है। प्रॉपर्टी की कुल वैल्यू पर जीएसटी लगता है। जमीन, अन्य अचल संपत्तियां जीएसटी से बाहर हैं। स्टैंप ड्यूटी भी जीएसटी के दायरे से बाहर है। अभी 6-9 फीसदी स्टैंप ड्यूटी लगती है
प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन पर भी जीएसटी नहीं लागू है। बता दें कि स्टैंप ड्यूटी राज्यों की कमाई का बड़ा जरिया है।


इस बीच जीएसटी के नाम पर मुनाफाखोरी की खबरें भी आ रही हैं। रियल एस्टेट इंडस्ट्री के खिलाफ शिकायतें हैं कि बिल्डर 12 फीसदी की जगह 18 फीसदी जीएसटी वसूल रहे हैं। बिल्डर कच्चे माल पर चुकाई ड्यूटी भी ग्राहक से वसूल रहे हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा ग्राहकों को नहीं मिल रहा है।