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जीएसटीः विरोध में उतरे कपड़ा कारोबारी, काम हुआ ठप

प्रकाशित Mon, 10, 2017 पर 15:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जीएसटी पूरे देश में लागू हो चुका है और देश में एक नए टैक्स सिस्टम की शुरुआत हुई है। लेकिन अभी भी बहुत से लोग इसका विरोध कर रहे है। खासकर कारोबारी तबके से विरोध की आवाजें आनी शुरु हो गई है। विरोध के कई कारण कारोबारियों के पास है। टेक्सटाइल कारोबारियों को जीएसटी से काफी बड़ा विरोध है।

टेक्सटाइल कारोबारियों की तरफ से जीएसटी का विरोध अब तेज़ होता जा रहा है। गुजरात में कपड़ा कारोबारी पिछले कई दिन से इसका विरोध कर रहे है। सूरत का कपड़ा मार्केट पिछले एक हफ्ते से बंद है। आज से अहमदाबाद के कपड़ा कारोबारी भी अनिश्चित काल के बंद पर चले गए हैं। ये कपड़ा कारोबारी मांग कर रहे हैं कि जीएसटी को यार्न के स्तर पर ही लगा दिया जाए न कि कारोबार के अलग अलग हिस्सों पर टैक्स लगाया जाए।


कारोबारियों का कहना है कि ऐसा करने से कपड़े महंगे होंगे। इन लोगों का ये भी कहना है कि अभी बहुत से छोटे कारोबारी जीएसटी के नए सिस्टम के लिए तैयार नहीं हैं और तैयारी के लिए कम से कम 2 महीने का वक्त चाहिए।



टेक्सटाइल पर जीएसटी की दरें इस तरह से लागू की गई है। कच्चा रेशम, गांधी टोपी, राष्ट्रीय ध्वज, खादी यार्न, नारियल फाइबर और जूट फाइबर पर जीएसटी की दरें लागू नहीं की गई है। वहीं सिल्क यार्न, वुलन यार्न, कॉटन यार्न और जरी के कपड़े पर 5 फीसदी तक की टैक्स लगाएं गए है जबकि रबर के धागे, कार्पेट, मैट, टेरिकॉट टॉवेल, क्विल्ट टेक्सटाइल पर 12 फीसदी टैक्स की दरें निर्धारित की गई है।


सिंथेटिक यार्न, नायलॉन, पॉलिएस्टर, टेक्सटाइल मशीनरी और विस्कोज रेयॉन पर 18 फीसदी टैक्स लागू नहीं की गई है जबकि 1000 रुपये से कम कीमत के रेडीमेड कपड़ों पर 5 फीसदी टैक्स और 1000 रुपये से ज्यादा कीमत रेडीमेड कपड़ों पर 12 फीसदी टैक्स लगाया गया है।