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ई-वॉलेट कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए गाइडलाइंस

प्रकाशित Fri, 10, 2017 पर 16:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अगर आप ई-वॉलेट के जरिेए लेनदेन करते हैं तो ये खबर आपके लिए है। ई वॉलेट कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए सरकार ने ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की है। गाइडलाइंस के तहत पेटीएम और मोबिक्विक जैसी ई वालेट कंपनियों के लिए हैकिंग से बचने के पूरे इंतजाम करना और कंज्यूमर के लिए चीफ ग्रिवांस ऑफिसर अप्वाइंट करना जरूरी होगा।


ई वॉलेट के बढ़ते इस्तेमाल के मद्देनजर सरकार ने दिशा निर्देश जारी कर इनपर पर राय मांगी है। प्रस्तावित गाइडलाइंस के मुताबिक हर प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट (पीपीआई) कंपनी या वॉलेट कंपनी  को अपनी वेबसाइट पर प्राइवेसी पॉलिसी की जानकारी देना मैनडेटरी होगा। साथ ही हर कंपनी को चीफ ग्रिवांस ऑफिसर अप्वाइंट करना होगा। ग्रिवांस ऑफिसर को 36 घंटे के अंदर कंज्यूमर की शिकायत का निपटारा करना जरुरी होगा।
 
सरकार के प्रस्तावित रेगुलटेरी फ्रेमवर्क पर पेटीएम ने कुछ कहने से मना कर दिया जबकि मोबिक्विक ने इसे अच्छा कदम बताया है।


हैकिंग के हमलों से बचने के लिए कंपनियों को अलग से साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी बनानी होगी और साइबर अटैक की स्थिति में सरकारी एजेंसियों को फौरन सूचित करना होगा। प्रस्तावित गाइडलाइंस के मुताबिक ई वॉलेट की वेबसाइट और मोबाइल एप्लीकेशन पर पेमेंट सिस्टम के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी आसान शब्दों में लिखी होनी चाहिए ताकि हर उपभोक्ता ये अंदाजा लगा सके कि उसकी कौन सी सूचनाएं ली जाएंगी और उनका इस्तेमाल क्या होगा।


इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मंत्रालय की तरफ से इंफॉर्मेशन टेक्नोलजी रुल्स 2017 के तहत ये ड्राफ्ट नोट जारी किया गया है। सरकार की उम्मीद है कि इससे कंज्यूमर्स की पर्सनल इंफॉर्मेशंस को ज्यादा सिक्योरिटी मिलेगी और शिकायतों का निपटारा भी समयबद्द तरीके से होगा।