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आईबीआई के रेट कट से कितना होगा फायदा!

प्रकाशित Wed, 02, 2017 पर 16:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने आखिरकार इस साल दरों में कटौती कर ही दी। आरबीआई का मानना है कि अच्छी बारिश और सप्लाई लाइन सुधरने से महंगाई कुछ कम हुई है। लेकिन कर्ज माफी, जीएसटी और वेतन वृद्धि से आगे महंगाई को हवा मिल सकती है। ऐसे में हमारे और आपके लिए क्या है इस पॉलिसी में, इसी को यहां डीकोड किया जा रहा है।


आरबीआई ने क्रेडिट पॉलिसी में रेपो रेट 0.25 फीसदी की कटौती कर दी है। नई रेपो दर 6.25 फीसदी से घटकर 6 फीसदी रह गई है। इसी के साथ रिवर्स दर घटकर 5.75 फीसदी रह गई है। वहीं मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी एमएसएफ दर और बैंक दर 6.5 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी रह गई है। हालांकि सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की 6 में से 4 सदस्यों ने 0.25 फीसदी कटौती के पक्ष में वोट दिया था। वहीं एक सदस्य ने 0.5 फीसदी और एक सदस्य ने कोई बदलाव नहीं करने का समर्थन किया था। आरबीआई ने रिटेल महंगाई का अनुमान 4 फीसदी रखा है। आरबीआई को लगता है कि अगले 1.5 से 2 साल में रिटेल महंगाई बढ़ सकती है।


आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल का कहना है कि महंगाई में लगातार कमी की वजह से ब्याज दरों में कटौती का फैसला किया गया है। 3 महीने में कोर महंगाई दर लगातार नीचे है। सामान्य मॉनसून, सप्लाई से खाद्य महंगाई पर असर पड़ा है। हालांकि आरबीआई ने आगे महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई है। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल का कहना है कि महंगाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने इशारों इशारों में किसानों के कर्ज माफी पर भी सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आगे कहा कि किसानों के कर्ज माफी से वित्तीय घाटा बढ़ने का अनुमान है। जीएसटी और राज्यों में वेतन बढ़ोतरी से भी महंगाई बढ़ सकती है। एमपीसी लगातार महंगाई पर नजर बनाए हुए है।


आरबीआई की राय है कि अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम को बढ़ावा देना और इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतों को दूर करना जरूरी है। बैंकों के लिए लिक्विडिटी कवरेज नियम आसान किए गए हैं। सरकारी बैंकों में पूंजी डालने पर काम जारी है। वित्तीय घाटे को ध्यान में रखकर पूंजी दी जाएगी।


रिजर्व बैंक ने निवेशकों को सस्ते कर्ज का तोहफा किया है। दरें कम होने से ईएमआई कम होने का रास्ता साफ हो गया है। कंज्यूमर के मन में अब यही सवाल है की चौथाई फीसदती दरें कम होने से उनकी ईएमआई पर क्या असर पड़ेगा। मान लीजिए अगर बैंकों ने भी 0.25 फीसदी कर्ज सस्ता किया तो ईएमआई का बोझ कम होना तय है। अगर आपने 30 लाख का होमलोन 20 साल के लिए लिया है तो हर महीने आपकी 475 रुपये की बचत होगी। मौजूदा ब्याज में आपको हर महीने 26,320 की ईएमआई चुकानी होती है लेकिन कर्ज सस्ता होने के बाद आपकी ईएमआई 475 रुपये कम होकर 25,845 रुपये हो जाएगी।