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ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बढ़ रहा शोषण, कैसे मिलेगा छुटकारा!

प्रकाशित Wed, 04, 2017 पर 18:40  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इंटरनेट से हमे एक नई दुनिया तो मिली है लेकिन इस नई दुनिया में अच्छी बातों के साथ दिक्कतें, परेशानियां और खतरे भी बहुत हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों में आधे से ज्यादा लोग हैरासमेंट का शिकार हैं तो दूसरी तरफ एक और रिपोर्ट कहती है कि बहुत बड़ी बड़ी कंपनियों के अहम डाटा हैकर्स ने चुरा लिया हैं यानि चोरी डकैती जैसी बातें ऑनलाइन।


देश में तेजी से बढ़ता इंटरनेट का इस्तेमाल समाज के लिए नया खतरा पैदा कर रहा है। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनी नॉर्टन के एक सर्वे के मुताबिक देश में 80 फीसदी लोग किसी न किसी तरह से सोशल मीडिया पर शोषण का शिकार हो रहे हैं। जिसमें ट्रोलिंग से लेकर ई-मेल के जरिए आपत्तिजनक संदेश और धमकी के मामले शामिल है।


सर्वे के मुताबिक करीब 45 फीसदी साइबर बुलिंग की घटनाएं ज्यादातर अनजान लोगों की तरफ से अंजाम दी जाती हैं जबकि इस तरह की करीब 41 फीसदी घटनाएं उन लोगों की ओर से होती हैं जिनसे आप कभी-कभार मिले हैं। ऑनलाइन शोषण की वजह से लोगों में डिप्रेशन, गुस्सा, डर और सहमापन जैसे लक्षण देखने को मिले हैं। नॉर्टन के मुताबिक इनसे बचने के लिए मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप और उन पर इन्स्टॉल सोशल मीडिया एप्स की वर्चुअल सिक्योरिटी सबसे ज्यादा जरूरी है।


सर्वे के अनुसार 63 फीसदी इंटरनेट यूजर्स बदनामी से डरते है जबकि 59 फीसदी यूजर्स अफवाह और 50 फीसदी ट्रोलिंग से डरते है। शारीरिक हिंसा की धमकी 44 फीसदी को मिली है जबकि 45 फीसदी ई-मेल के जरिए धमकी दी गई है। ऑनलाइन शारीरिक हिंसा के मामले में मुंबई 51 फीसदी, दिल्ली 47 फीसदी और हैदराबाद में 46 फीसदी धमकी मिली है।


सेकराइट साइबर इंटेलिजेंस ने खुलासा किया है कि भारतीय कंपनियों का डाटा खतरे में है। जिनमें सरकारी, निजी कंपनियां शामिल है। हैकर्स के पास 6,000 ई-मेल आईडी की जानकारी है। इंटरनेट प्रोटोकॉल, सर्वर, डाटाबेस की जानकारी है।


बता दें कि आईआरआईएनएन पर सबसे ज्यादा असर पड़ा सकता है। आईआरआईएनएन भारत की नेशनल इंटरनेट रजिस्ट्री है। इस पर आईपी एड्रेस, एएसएन का रजिस्ट्रेशन होता है। कंपनियों के आईपी एड्रेस खतरे में पड़ सकते हैं। हैकर्स आईपी एड्रेस को बदल कंपनी की सेवाएं बाधित कर सकते हैं।


सेकराइट साइबर इंटेलिजेंस ने खुलासा किया है कि भारतीय कंपनियों का डाटा खतरे में है। जिनमें सरकारी, निजी कंपनियां शामिल है। हैकर्स के पास 6,000 ई-मेल आईडी की जानकारी है। इंटरनेट प्रोटोकॉल, सर्वर, डाटाबेस की जानकारी है।


जानकार मानते है कि इससे बचने के लिए इंटरनेट यूजर्स को सोशल वेबसाइट्स का पासवर्ड मजबूत करना होगा। जिसके लिए इंटरनेट यूजर्स समय-समय अपने पासवर्ड में बदलाव करें और उन्हीं ऐसे पासवर्ड रखें जिसका आसानी से पता ना चल सकें।