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दिवालियेपन के कगार पर जेपी, कैसे मिले अपना घर

प्रकाशित Fri, 11, 2017 पर 18:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जेपी में बुरे फंसे, अपना घर हर किसी का सपना होता है। आधी रोटी खाकर भी इस सपने को सच करना चाहते हैं। तमाम मुश्किलों के बाद भी अपने आशियाने की आस में हर महीने ईएमआई भरते हैं लेकिन अब ये उम्मीद टूटती दिख रही हैं। जेपी इंफ्राटेक में घर खरीदने के लिए लोगों ने मेहनत की जमा पूंजी लगाई। पहले पजेशन में देरी हुई और अब कंपनी दिवालिया होने की कगार पर है। ऐसे घर खरीदार परेशान हैं कि अब उनका सपना कैसे पूरा होगा। घर मिलेगा या नहीं और कंपनी दिवालिया हो गई तो फंसा हुआ पैसा कैसे वसूल होगा। क्या घर खरीदारों के संकट को दूर करने में सरकार दखल देगी।


देश की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में से एक जेपी इंफ्राटेक जल्द ही दिवालिया घोषित हो सकती है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी ने जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है।


जेपी इंफ्राटेक के अटके प्रोजेक्ट की लिस्ट काफी लंबी है। इस लिस्ट में जेपी अमन, जेपी कॉसमॉस, जेपी बुलवार्ड, जेपी कासा आयल, जेपी केंजिंगटन, जेपी पवेलियन कोर्ट और जेपी कैलिप्सो कोर्ट का नाम शामिल किया है।


आईडीबीआई ने जेपी को दिवालिया घोषित करने की मांग थी जिसके बाद आईडीबीआई की याचिका पर जेपी इंफ्राटेक की दिक्कते बढ़ी और हालात यहां तक खराब हुई कि नेशनल कंपनी लॉ बोर्ड ट्रिब्यूनल जेपी को दिवालिया कंपनी के तौर पर माना और कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।


इस प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्रा की संपत्तियों का मूल्यांकन होगा। रिवाइवल के लिए कंपनी को मिला 9 महीने का वक्त मिलेगा। इसके लिए 7 अकाउंटिंग कंपनियों में से एक को जिम्मा मिलेगा और कर्ज चुकाने की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा। 270 दिनों के भीतर कंपनी के फाइनेंस की जांच होगी और अगर कर्ज चुकाने की हालत नहीं बनी तो नीलामी होगी। फिलहाल कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को निलंबित कर दिया गया है। जेपी इंफ्राटेक, जेपी एसोशिएट की बड़ी कंपनियों में से एक है। जेपी एसोसिएट का जेपी इंफ्रा में 71.64 फीसदी हिस्सा है।


जेपी इंफ्राटेक पर करीब 8365 करोड़ रुपये का कर्ज है। कंपनी पर आईडीबीआई बैंक का 4000 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। ग्रेटर नोएडा में जेपी के करीब 32 हजार प्रोजेक्ट है जबकि जेपी इंफ्रा के 32 हजार फ्लैट निर्माणाधीन है।


जेपी इंफ्राटेक ने अक्टूबर 2017 तक ग्राहको को 6,000 फ्लैट डिलिवरी और अक्टूबर 2018 तक 8,000 फ्लैट की डिलिवरी करने का वादा किया था। लेकिन खराब मार्केट की वजह से घर के पजेशन में देरी हुई और रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ी सुस्ती के कारण घर खऱीदार अपने आशियाने के पूरा होने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन अब कंपनी के दिवालिया घोषित होने पर उनकी समस्याएं और भी गंभीर हो गई है।


मौजूदा समय में ग्राहको के पास कुछ ही ऑप्शन बचते है। ग्राहक कंपनी ने अपना क्लेम लेने के लिए दावा भर सकते हैं। जितनी राशि बिल्डर को दी है वो डिटेल भरें और कंपनी अगर दिवालिया हुई तो रिकवरी की मांग करें। हालांकि रीस्ट्रक्चरिंग पूरी होने तक रिकवरी संभव नहीं होती। रिकवरी की प्रक्रिया रिवाइवल प्लान फेल होने पर ही संभव है। लेकिन ग्राहक अथॉरिटी पर रिकवरी के लिए दबाव बना सकते हैं और वह घर बनवाने के लिए भी मांग रख सकते हैं। घर खरीदारों को इंसाफ मिले यह अथॉरिटी की जिम्मेदारी होती है।