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लेबलिंग नियमों पर कारोबारियों को राहत

प्रकाशित Sat, 13, 2018 पर 16:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

नए लेबलिंग नियमों को लागू करने में इंडस्ट्री को दिक्कतें आ रही हैं। इसे देखते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इंडस्ट्री को एक बार फिर राहत देने का फैसला किया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नियम लागू करने के लिए कारोबारियों को 31 जनवरी तक का समय बढ़ा दिया है।


सरकार ने मैन्युफैक्चरर्स, पैकर्स और इंपोर्टर्स को थोड़ी राहत दे दी है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सभी राज्यों के लीगल डिपार्टमेंट को चिट्ठी लिखी है जिसमें कहा गया है कि अगर कोई कारोबारी केंद्र सरकार की ओर से लागू पैकेज्ड कमोडिटी के नए नियम अभी लागू नहीं कर पा रहा है तो 31 जनवरी तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए।


केंद्र सरकार ने साल की शुरुआत से ही डिब्बा बंद सामान की पैकेजिंग को लेकर नए नियम लागू किए थे जिसमें पैकेट के साइज के 40 फीसदी हिस्से में सामान की जानकारी देना, एमआरपी को बड़े अक्षरों में लिखना, सामान की मैन्युफैक्चरिंग डेट या महीने की जानकारी देना, डेट ऑफ एक्सपायरी की जानकारी देना और कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर की पूरी जानकारी बड़े अक्षरों में देना शामिल है। लेकिन इंडस्ट्री में इन नियमों को लेकर आज भी कंफ्यूजन बना हुआ है।


उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय चाहता है कि नए लेबलिंग नियमों को इंडस्ट्री जल्द से जल्द अपनाए। इसके लिए मंत्रालय ने एक बार फिर इंडस्ट्री के कंफ्यूजन को दूर करने के लिए एडवाइजरी भी जारी कि है। इतना ही नहीं राज्यों के लीगल डिपार्टमेंट को लिखी चिठ्ठी में निर्देश दिए हैं कि इस एडवाइजरी को 31 जनवरी से पहले पहले सभी मैन्युफैक्चरर, पैकर्स और इंपोर्टर्स के बीच इसे सर्कुलेट भी किया जाए।


सरकार ने नई एडवाइजरी में कहा है कि ई-कॉमर्स कंपनियों को सामान की पैकेजिंग पर महीना या साल लिखना जरूरी नहीं है। इसके अलावा सभी कंपनियों को अपने डिब्बा बंद सामान पर एमआरपी के साथ लिखे इन्क्लूसिव ऑफ ऑल टैक्सेस या रुपये का फॉन्ट साइज अपने हिसाब से लिखने की अनुमति है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक ये एडवाइजरी कंपनियों के लिए आखिरी है। इसके बाद अगर नए नियमों को लेकर गड़बड़ी पाई गई तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।