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आइए जानें एफएंडओ में ट्रेडिंग बैन लिस्ट का सच

प्रकाशित Fri, 21, 2017 पर 13:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

क्या आप जानते हैं कि एफएंडओ के ट्रेड में शेयर बैन लिस्ट में क्यों चला जाता है, रोज कम से कम आधा दर्जन शेयर एफएंडओ बैन में होते हैं, आज तो 13 शेयर बैन लिस्ट में शामिल थे, क्या है ये बैन लिस्ट का खेल और कैसे मैनेज होता है ये, आइए Moneycontrol.com के एडिटर संतोष नायर के साथ जानतें हैं इसका राज।


ऑपरेटर भाव में गिरावट रोकने के लिए पोजीशन बनाते हैं। ये खेल ज्यादा बड़ी लॉन्ग पोजीशन होने पर होता है। कभी-कभी मंदी के लिए भी पोजीशन बनाई जाती है। नई पोजीशन तय सीमा से कम होने पर ही बन सकती है। आउट-ऑफ-मनी वाले कॉन्ट्रैक्ट में ज्यादा सौदे होते हैं। आउट-ऑफ-मनी वाले कॉन्ट्रैक्ट में मार्जिन कम लगती है। ऑपरेटरों का ग्रुप आपस में ट्रेड करके बैन लगाता है।


एफएंडओ बैन के कुछ नमूनों की बात करें तो बीते 5 सालों में इंडियाबुल्स रियल 295 दिन बैन में रहा, एचडीआईएल का शेयर 223 दिन बैन में रहा। इसी तरह जेएसपीएल 158, सुजलॉन 105 और जेपी एसोसिएट 104 दिन बैन में रहे। जनवरी 2017 में जेपी एसो 22 में से 9 ट्रेडिंग दिन बैन में रहा। वहीं इंफीबीम, उज्जीवन एफएंडओ में आते ही मंदी की वजह से बैन में आ गए।


आपको बता दें कि मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट 95 फीसदी से ज्यादा होने और सभी कॉन्ट्रैक्ट्स का ओपन इंटरेस्ट 95 फीसदी से ज्यादा होने पर एफएंडओ में ट्रेडिंग बैन लगाया जाता है। गौरतलब है कि मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट पिछले महीने के औसत डेली वॉल्यूम का 30 गुना या पब्लिक होल्डिंग के 20 फीसदी शेयर के बराबर होता है। इस बारे में एक्सचेंज हर महीने शेयरों की लिमिट जारी करता है।


ट्रेडिंग बैन कब हटता है इस पर जानकारी देते हुए जानकारों ने कहा कि ओपन इंटरेस्ट 80 फीसदी से कम होने पर नॉर्मल ट्रेडिंग शुरू हो जाती है। ट्रेडिंग बैंक असर की बात करें तो ऐसा होने पर लॉन्ग या शॉर्ट के नए सौदे नहीं बनाए जा सकते हैं। बैन के दौरान भी पुराने सौदे काटे जा सकते हैं। बैन में होने पर भी इंट्रा-डे सौदे किए जा सकते हैं।