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हाइपरलूप का जादू, मिनटों में होगा घंटों का सफर!

प्रकाशित Fri, 08, 2017 पर 08:51  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हाइपरलूप को ट्रांसपोर्टेशन का चौथा मोड कहा जा रहा है। यानि जल, थल और वायु मार्ग के बाद अब हाइपरलूप। हाइपरलूप का कॉन्सेप्ट वैक्यूम के सिद्धांत पर टिका है। जहां एक पाइपनुमा रास्ते पर किसी सवारी डिब्बे या पॉड को चलाया जाएगा। जब इस पाइप से हवा बाहर खींच ली जाएगी और वैक्यूम पैदा कर दिया जाएगा तो उसमें चलने वाले पॉड की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी क्योंकि वहां उसे रोकने के लिए कोई गतिरोध नहीं रहेगा। बस यही है हाइपरलूप। हाइपरलूप में 1200 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार हासिल की जा सकती है यानि हवाई जहाज से भी तेज रफ्तार।


हाइपरलूप अमेरिका में टेस्ला मोटर्स के फाउंडर एलन मस्क के दिमाग की उपज है। मस्क ने 2012 में ये कॉन्सेप्ट दुनिया के सामने रखा और इस पर काम करने के लिए सबको आमंत्रित किया। हालांकि आज उनकी ही एक कंपनी स्पेस एक्स इस पर काम भी कर रही है, जिसने अमेरिका के नवाडा में 1 मील लंबा हाइपरलूप ट्रैक लागाया है और दुनियाभर के इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और डिजाइनिंग के छात्रों को एक प्रतियोगिता के जरिए अपने अपने हाइपरलूप पॉड मॉडल को विकसित करने के लिए कहा है।


वैसे हाइपरलूप वन और हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी ऐसी दो कंपनियां हैं जो इसके कमर्शियल इस्तेमाल पर काम कर रही हैं। हाइपरलूप इस वक्त किसी भी देश में ऑपरेशनल नहीं है लेकिन इतना तय है कि आने वाले वक्त में ये हमारे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह से बदलने का दम रखता है।


ट्रैफिक में फंसे होने के दौरान आप सोचते होंगे कि काश वहां से जल्द निकल पाते, लेकिन रफ्तार का किंग कहलाने वाला हाइपरलूप आपकी इस टेंशन को दूर कर देगा। भारत में अब ट्रांसपोर्टेशन के इस नए आयाम को हकीकत बनाने का काम करेगी हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी। दरअसल एचटीटी ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ करार किया है जिसके तहत अमरावती से लेकर विजयवाड़ा तक हाइपरलूप शुरू किया जाएगा। हाइपरलूप शुरू होने के बाद 1 घंटे का सफर महज 5 मिनट में पूरा हो सकेगा। यही नहीं इस करार के तहत 2500 नई नौकरियां भी पैदा होंगी।


इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में 6 महीने की रिसर्च की जाएगी। पहले चरण का काम पूरा होने के बाद दूसरे चरण में हाइपरलूप बनाने का काम शुरू होगा। आपको बता दें कि हाइपरलूप में वैक्यूम पाइप में से ट्रांसपोर्टेशन कैप्सूल या पॉड को एक जगह से दूसरी जगह पर हवाई जहाज से भी तेज रफ्तार से भेजा जाता है। ये मुमकिन होगा इलेक्ट्रिक मोटर की ओर से मिली ताक़त, कंट्रोल किए गए मैगनेटिक लैविटेशन यानि चुंबकीय शक्ति से हवा में तैरने की क्षमता और पाइप में हवा के कम से कम दबाव से कम हुए फ्रिक्शन की बदौलत।