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मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द

प्रकाशित Fri, 08, 2017 पर 16:17  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दिल्ली के शालीमार बाग के मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द हो गया है। दिल्ली सरकार ने ये बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल मैक्स अस्पताल ने जिंदा बच्चे को मरा बता दिया था। जांच में मैक्स हॉस्पिटल को दोषी पाया गया है। दरअसल, दिल्ली के शालीमार बाग में मैक्स हॉस्पिटल ने जीवित बच्चे को मृत बताकर शव को कपड़े में बांधकर परिजनों को दे दिया था। शमशान ले जाते समय उस बच्चे की धड़कन चल रही थी और बाद में जांच के बाद बच्चा जीवित निकला।


दिल्ली सरकार ने पहले से भर्ती मरीजों का इलाज जारी रखने की छूट दी है, लेकिन नए मरीजों की भर्ती नहीं की जा सकेगी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द करने पर दिल्ली सरकार की आलोचना की है।


दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने बताया कि हमने हॉस्पिटल को आपराधिक लापरवाही बरतने का दोषी पाया है। हॉस्पिटल की यह पहली गलती नहीं है।


वहीं बच्चे के परिजनों का कहना है कि दिल्ली सरकार ने मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर बड़ी कार्रवाई की है जबकि इस पूरे मामले में भावुक बच्चे की दादी काफी भावुक हो गईं और कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही ने उनके बच्चों की जान ले ली।


आईएमए के नेशनल प्रेसिडेंट डॉक्टर के के अग्रवाल ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि एक डॉक्टर के गलती की सजा पूरे हॉस्पिटल को नहीं मिलनी चाहिए।


वहीं मैक्स हॉस्पिटल ने लाइसेंस रद्द करने के दिल्ली सरकार के फैसले को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि ये बहुत कठोर फैसला है और इससे मरीजों को सुविधा मिलने में दिक्कत होगी।


दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द किए जाने के खिलाफ उतर आया है। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि शालीमार बाग के मैक्स अस्पताल के लाइसेंस रद्द करने का फैसला वापस लिया जाए नहीं तो वो पूरी दिल्ली की मेडिकल व्यवस्था को ठप कर देंगे। एसोसिएशन ने निलंबित डॉक्टरों की बहाली की भी मांग की है। एसोसिएशन ने कहा है कि डॉक्टर इस माहौल में घुटा हुआ महसूस कर रहे हैं और वह बच्चा बेहद प्रीमेच्योर था, उसका जिंदा रहना बहुत मुश्किल था।


दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की ये भी दलील है कि मैक्स अस्पताल में क्या सिर्फ दो ही डॉक्टर काम करते थे? सरकार के कदम ने 1000 परिवारों को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया है। डॉक्टरों की संस्था ने यह भी कहा है कि सारे सरकारी अस्पतालों के लाइसेंस भी रद्द हों क्योंकि वहां कोई सुविधा नहीं है।