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समलैंगिक संबंधों को लेकर फिर नई बहस

प्रकाशित Mon, 08, 2018 पर 15:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

समलैंगिक संबंधों को लेकर एक बार फिर से देश में बहस शुरू हो गई है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट धारा 377 पर अपने फैसले की समीक्षा करने के लिए तैयार हो गया है। इस पूरे मामले की सुनवाई संविधान पीठ करेगी। फिलहाल आईपीसी की धारा 377 समलैंगिक रिश्तों को अपराध मानती है और उम्र कैद तक की सजा हो सकती है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि आईपीसी की धारा 377 पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा है।


दरअसल समलैंगिक संबंधों को अपराध घोषित किए जाने के फैसले के खिलाफ एलजीबीटी कम्यूनिटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि एलजीबीटी कम्यूनिटी के लोग अब अपने रिश्ते को लेकर डरे हुए हैं। उनकी दलील है कि जब से कोर्ट ने इसे गैरकानूनी करार दिया है तब से कम्यूनिटी के सदस्य डर के साए में जी रहे हैं।


एलजीबीटी एक्टिविस्ट सिमरन शेख ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एलजीबीटी कम्यूनिटी के लिए बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इससे इंसाफ के लिए नई उम्मीद जगी है। वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को निजी मामला माना है। ऐसे में उम्मीद जगी है कि एलजीबीटी कम्यूनिटी को आगे राहत मिल सकती है।


इधर धारा 377 की समीक्षा का कांग्रेस पार्टी ने स्वागत किया है। लेकिन बीजेपी नेता और सांसद सुब्रमणियन स्वामी ने कहा है कि एलजीबीटी को सामान्य नहीं माना जा सकता है। उन्होंने दोहराया समलैंगिक रिश्ते रखना अप्राकृतिक है।