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पहेरदारः साइबर क्राइम का बढ़ा खतरा, कितना तैयार है सिस्टम!

प्रकाशित Sat, 12, 2017 पर 16:20  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पर आने वाला टीवी का सबसे बड़ा कंज्यूमर शो पहरेदार ग्राहक की आवाज़ बुलंद करता है और लड़ता है ग्राहक के हक की लड़ाई। जब कंपनियों की मनमानी के सामने कंज्यूमर झुकने लगता है, तब उनके हक की आवाज़ लेकर पहरेदार करता है कंपनी से सवाल और कंपनी को देना होता है जवाब।


पहरेदार के जरिए उन लोगों को इंसाफ मिल पाता है जो कंपनियों के अड़ियल रवैये के चलते उन जरूरी सर्विसेज से महरूम रह जाते हैं जो उनका हक है। पहरेदार उन कंपनियों को भी सबक सिखाता है जो वादे तो कर देती हैं लेकिन उन्हें पूरे करने में आनाकानी करती हैं।


आज पहरेदार बात कर रहा है उस खतरे की जो चुपके से हमारी, आपकी और सभी की जिंदगी में दस्तक दे चुका है। यह खतरा है साइबर क्रिमनल्स का। दिल्ली में सीआईएसएफ के कर्मचारियों के अकाउंट में जैसे ही सैलरी पहुंची वैसे ही साइबर क्रिमिनलों ने पैसे साफ कर दिए। देश में हर 10 मिनट में साइबर क्राइम का एक मामला सामने आता है और देश के बैंकों को औसतन गर घंटे करीब 90,000 का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद पुलिस, प्रशासन और सरकार इन साइबर क्राइमों से निपटने में असफल क्यो रही है। साइबर क्राइम का यह बढ़ता खतरा कैसे देश की इकोनॉमी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।


आरबीआई के पूर्व गर्वनर के सी चक्रवर्ती का कहना है कि देश को डिजिटाइजेश के पहले मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की जरुरत है। लोगों को उनकी पेमेंट की सुरक्षा का भरोसा दिलाना जरुरी है। मजबूत, भरोसेमंद और सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना होगा। 


साइबर वकील प्रशांत माली के मुताबिक बैंक अभी तक साइबर क्राइम से निपटने को तैयार नहीं है. बैंक कंज्यूमर के प्रति जवाबदेह नहीं है। पुलिस साइबर क्राइम की एफआईआर नहीं लिखती है। इससे डिजिटल इंडिया के प्रति भरोसा घट सकता है। 


महाराष्ट्र पुलिस एसपी- साइबर बालसिंह राजपूत का कहना है कि साइबर क्राइम को लेकर डराना सही नहीं है। साइबर सिक्योरिटी में पीपुल प्रोसेस और टेक्नोलॉजी आती है। महाराष्ट्र में तीनों क्षेत्रों में काम हो रहा है। महाराष्ट्र में गर जिले में साइबर पुलिस स्टेशन है। हमारी कोशिश है कि जल्दी से जल्दी शिकायत लिखी जाएं। ईमेल, व्हाट्सऐप से भी पुलिस के पास शिकायत दर्ज करा सकते है।